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कोर्ट ने NTA और केंद्र सरकार से मांगा जवाब
नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से पूछा कि जब विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें लागू की गई थीं, तब पेपर लीक जैसी गंभीर घटना आखिर कैसे हो गई। अदालत ने कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और यह पता लगाना होगा कि चूक कहां हुई।
विशेषज्ञ समिति से भी पूछे गए सवाल
सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने कुल 60 सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकांश लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2025 की NEET-UG परीक्षा संतोषजनक तरीके से संपन्न हुई थी और कुछ केंद्रों पर बिजली बाधित होने जैसी मामूली समस्याओं को छोड़ दें तो परीक्षा सफल रही। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी री-नीट परीक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि समिति नियमित रूप से निगरानी कर रही थी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यदि निगरानी के बावजूद यह घटना हुई है, तो या तो सिफारिशों में कमी थी या फिर उनका सही तरीके से पालन नहीं हुआ।
“युवाओं का भविष्य दांव पर”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और प्रधानमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इतनी उच्च स्तर की निगरानी के बावजूद पेपर लीक हुआ है, तो यह और भी दुखद स्थिति है।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है और संस्थागत मजबूती बेहद आवश्यक है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि UPSC जैसी संस्थाओं में इस तरह की समस्याएं नहीं आतीं, क्योंकि वहां व्यवस्था मजबूत और स्थायी है।
केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2 जुलाई से पहले हलफनामा दाखिल कर बताए कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि NTA में संस्थागत क्षमता और विशेषज्ञ संसाधनों को मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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