हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
विदेश मंत्रालय ने नागरिकता और पासपोर्ट को लेकर स्थिति की स्पष्ट
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है, न कि भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है, लेकिन केवल पासपोर्ट होने मात्र से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः सिद्ध नहीं होती।
2025 में जारी हुए 1.39 करोड़ पासपोर्ट
मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में पासपोर्ट और संबंधित सेवाओं के तहत लगभग 1.5 करोड़ सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट जारी किए गए। अधिकारी ने बताया कि पुलिस सत्यापन को छोड़कर सामान्य परिस्थितियों में पासपोर्ट जारी करने में छह कार्यदिवस लगते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में आवेदन प्रक्रिया 45 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है।
77 से बढ़कर 545 हुए पासपोर्ट केंद्र
देश में पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। पिछले वर्ष 10 नए POPSK केंद्र खोले गए थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाने की योजना है।
भारतीयों के लिए बढ़ी अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुविधाएं
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश देने वाले देशों की संख्या 2019 के 16 देशों से बढ़कर 27 हो गई है। इसके अलावा 47 देशों में ‘वीजा ऑन अराइवल’ और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है। यूरोपीय देशों के साथ किए गए मोबिलिटी एग्रीमेंट छात्रों, शोधार्थियों, पर्यटकों और व्यापारियों की आसान आवाजाही में सहायक साबित हो रहे हैं।
क्या कहता है नागरिकता कानून?
नागरिकता कानून के अनुसार 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है। वहीं 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे व्यक्ति को नागरिकता का दावा करने के लिए यह साबित करना होगा कि उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक है। केवल जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड या पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाते।
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