हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
ढाका की सियासत में फिर हलचल
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने इस वर्ष देश लौटने का ऐलान कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 22 महीने से भारत में रह रहीं हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में 663 मुकदमे दर्ज हैं और एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद उनकी वापसी की घोषणा ने ढाका से नई दिल्ली तक सियासी हलचल बढ़ा दी है।
वापसी के पीछे क्या है वजह?
78 वर्षीय शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद अवामी लीग की गतिविधियां लगभग ठप पड़ गईं। पार्टी पर प्रतिबंध लगा हुआ है और नेतृत्व परिवर्तन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हसीना पार्टी की कमान किसी अन्य नेता को सौंपतीं, तो भविष्य में उनके परिवार का प्रभाव कमजोर पड़ सकता था। ऐसे में उनकी वापसी को अवामी लीग को फिर से सक्रिय करने की रणनीति माना जा रहा है।
बदलते राजनीतिक संकेत
हाल के दिनों में चुनाव आयोग ने अवामी लीग से जुड़े कार्यकर्ताओं को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने का संकेत दिया है। वहीं, संसद में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठी है। इन घटनाओं को विपक्षी दल नई राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी का आरोप है कि सरकार अवामी लीग को दोबारा मुख्यधारा की राजनीति में लाने की तैयारी कर रही है।
663 मुकदमे और मौत की सजा
शेख हसीना के खिलाफ दर्ज 663 मामलों में 453 हत्या से जुड़े हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप भी शामिल हैं। उनके परिवार के कई सदस्य भी कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। 2024 के विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के एक मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में उनकी संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकती है।















