हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
2/3 बहुमत मिलने पर लागू हो सकते हैं अहम बदलाव, महिला आरक्षण और जेल जाने पर इस्तीफे का प्रावधान भी एजेंडे में
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार आने वाले समय में संविधान में पांच महत्वपूर्ण संशोधन करने की तैयारी में जुटी है। यदि संसद में इन प्रस्तावों को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत मिल जाता है तो देश की चुनावी व्यवस्था, राजनीतिक ढांचे और प्रशासनिक प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार की प्राथमिकता में परिसीमन, महिला आरक्षण, ‘एक देश-एक चुनाव’, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े सुधार तथा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के जेल जाने की स्थिति में 30 दिन के भीतर इस्तीफा देने का प्रावधान शामिल बताया जा रहा है।
अनुच्छेद 368 के तहत होता है संविधान संशोधन
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार बदलती राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप संविधान में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। संविधान के मूल ढांचे और मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की निर्धारित सीमाएं भी लागू रहती हैं।
इन पांच मुद्दों पर सरकार का फोकस
सरकार लोकसभा सीटों के नए परिसीमन के लिए संवैधानिक संशोधन लाना चाहती है। इसी परिसीमन के आधार पर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना है। इसके अलावा ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव भी एजेंडे में है। समान नागरिक संहिता से जुड़े संवैधानिक सुधारों पर भी सरकार आगे बढ़ना चाहती है। वहीं एक अन्य प्रस्ताव के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री जेल जाता है तो उसे 30 दिन के भीतर पद छोड़ना अनिवार्य करने का प्रावधान लाने की चर्चा है।
संविधान संशोधन का इतिहास
स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक 30 संवैधानिक संशोधन इंदिरा गांधी के कार्यकाल में हुए। जवाहरलाल नेहरू सरकार ने 16, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 14, राजीव गांधी सरकार ने 12 और पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने 11 संशोधन किए। मोदी सरकार अब तक आठ संविधान संशोधन करा चुकी है। यदि प्रस्तावित संशोधन पारित होते हैं तो यह आंकड़ा 13 तक पहुंच जाएगा।
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