हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
परिवारों में संवाद की कमी और बढ़ती मोबाइल संस्कृति पर जताई चिंता, मातृत्व को बताया समाज और संस्कृति की सबसे मजबूत नींव
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पहले की तरह केवल आदेश मानने वाली नहीं है, बल्कि हर बात पर सवाल करती है और तर्कसंगत जवाब चाहती है। इसलिए युवाओं के साथ समय बिताने और निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में परिवारों के भीतर बातचीत कम होती जा रही है, जिसका असर बच्चों के व्यक्तित्व और संस्कारों पर पड़ रहा है।
दिल्ली के आंबेडकर भवन में विश्वमांगल्य सभा के ‘युगानुकूल मातृत्व’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि पहले माता-पिता की बात बिना किसी बहस के मान ली जाती थी, क्योंकि उनके अनुभवों पर विश्वास होता था। लेकिन अब नई पीढ़ी हर बात का विश्लेषण करती है और केवल उपदेश नहीं, बल्कि व्यवहार में भी वही देखना चाहती है जो उसे सिखाया जाता है।
उन्होंने कहा कि आज अधिकांश परिवारों में हर सदस्य अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहता है, जिससे संवाद लगभग समाप्त हो गया है। यदि परिवार में समय देकर खुलकर बातचीत की जाए तो बच्चे अपनी जिज्ञासाएं और समस्याएं सहजता से साझा करेंगे। बच्चों के शुरुआती 12 वर्ष उनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए इस अवधि में सही मार्गदर्शन आवश्यक है।
महिलाओं और मातृत्व पर विचार रखते हुए भागवत ने कहा कि माता मनुष्य की पहली शिक्षक और गुरु होती है। मातृत्व सृष्टि के संवर्धन, पोषण और निरंतरता का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवनभर भावनात्मक सहारे की आवश्यकता महसूस करता है और इसका सबसे बड़ा केंद्र माता होती है।
संघ प्रमुख ने कहा कि आधुनिकता और बढ़ते व्यक्तिवाद के कारण परिवार, विवाह और सामाजिक दायित्वों के प्रति लोगों का दृष्टिकोण बदल रहा है। विवाह और रिश्तों को लेन-देन या व्यक्तिगत सुविधा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों पर विश्वास बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि विदेशी जीवनशैली को बिना सोचे-समझे अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के अनुरूप समाज को आगे बढ़ाना चाहिए।













