37 वोट से तय होगी एक सीट, भाजपा-एनडीए के सामने सात सीटों का गणित; सपा दो सीटों के लिए मजबूत स्थिति में, दसवीं सीट पर बन सकता है पेच
नई दिल्ली, 22 सितंबर। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर द्विवार्षिक चुनाव होगा, जबकि पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। सभी सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने जा रहे इन चुनावों में मौजूदा विधानसभा का संख्या बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्तर प्रदेश की 10 सीटों में फिलहाल आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है। भाजपा के जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी, हरदीप सिंह पुरी और दिनेश शर्मा शामिल हैं। दिनेश शर्मा इस्तीफा दे चुके हैं। सपा के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी भी इस चुनाव में कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों में शामिल हैं।
37 वोट पर एक सीट का कोटा
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती। संबंधित राज्य के निर्वाचित विधायक आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत मतदान करते हैं। यूपी विधानसभा की प्रभावी संख्या इस समय 397 है। मौजूदा गणित के अनुसार एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता मत की जरूरत है।
भाजपा के पास 256 विधायक हैं। उसके सहयोगियों अपना दल (सोनेलाल), राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी के विधायकों को जोड़ने पर एनडीए का संख्या बल और बढ़ जाता है। इस गणित के आधार पर एनडीए सात उम्मीदवारों को आवश्यक 37-37 वोट उपलब्ध करा सकता है। दूसरी ओर सपा के 101 और कांग्रेस के दो विधायक हैं। दोनों को मिलाकर 103 विधायकों का संख्या बल है, जिससे सपा दो सीटों के लिए आवश्यक 74 वोट जुटाने की स्थिति में है।
यहीं से दसवीं सीट का गणित महत्वपूर्ण हो जाता है। सात सीटों के लिए 259 और दो सीटों के लिए 74 वोट इस्तेमाल होने के बाद दोनों खेमों के पास अतिरिक्त वोट बचेंगे, लेकिन किसी एक उम्मीदवार को 37 वोट पूरे करने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में उम्मीदवारों की संख्या, नामांकन और मतदान के दौरान प्रथम वरीयता वोट अहम होंगे। फिलहाल इसे केवल विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बसपा के सामने प्रतिनिधित्व बचाने की चुनौती
बसपा के पास वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में राज्यसभा की इस चुनावी प्रक्रिया में पार्टी के लिए अपनी मौजूदा सीट बरकरार रखना संख्या बल के लिहाज से संभव नहीं दिखता। 2020 के चुनाव में भी बसपा के रामजी गौतम निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस बार विधानसभा में बदले समीकरण के कारण स्थिति अलग है।
उत्तराखंड की एक सीट पर भी 16 अक्टूबर को मतदान होगा। वहां भाजपा के नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पश्चिम बंगाल में रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव होगा।
29 सितंबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर होगी। 16 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी।
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