नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : संसद के मानसून सत्र के खत्म होने में अब सिर्फ चार दिन बाकी हैं, लेकिन महिला आरक्षण, परिसीमन और फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयकों का भविष्य अभी भी साफ नहीं है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल इन विधेयकों के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं। सोमवार की लोकसभा की बिजनेस लिस्ट में भी इन तीनों में से कोई विधेयक शामिल नहीं है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर सहमति नहीं
संविधान संशोधन विधेयक में 2029 से लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण और चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का प्रस्ताव था। यह विधेयक अप्रैल में लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण 298-230 के अंतर से गिर गया था। उस समय के मुकाबले अब लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़कर 299 हो गई है, लेकिन यह अभी भी जरूरी 360 वोटों से कम है।
विपक्ष महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रहा है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन के खिलाफ अपनी पार्टी का रुख दोहराया है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को समर्थन देने का संकेत दिया है।
FCRA बिल पर विपक्ष का तीखा विरोध
25 मार्च को पेश किया गया FCRA संशोधन विधेयक विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों पर निगरानी और नियमों को और कड़ा करने का प्रस्ताव रखता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसके मौजूदा स्वरूप के खिलाफ हैं। ईसाई संगठनों ने भी इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार को सत्र के अंतिम दिनों में FCRA बिल आगे नहीं बढ़ाने की चेतावनी दी। उन्होंने इसे असंवैधानिक और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इसे पारित कराने की कोशिश हुई तो कड़ा विरोध किया जाएगा।
राहुल-रिजिजू की मुलाकात से नहीं बनी बात
सरकार की ओर से विपक्ष से संवाद की कोशिशें भी अब तक निर्णायक साबित नहीं हुई हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की, लेकिन राहुल ने विधेयकों पर सर्वदलीय सहमति की मांग रखी। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस हुई।
एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने FCRA विधेयक को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग की है। पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी कर सकता है।
चार दिन में तस्वीर साफ होने की उम्मीद
20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में NEET पेपर लीक सहित कई मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित रही है। अब सत्र समाप्त होने में चार दिन बचे हैं। ऐसे में सरकार के पास इन विवादित विधेयकों पर विपक्ष को साथ लेने और सदन में आगे बढ़ाने के लिए सीमित समय है। कांग्रेस ने भी 10 से 12 अगस्त तक अपने सांसदों को जरूरी मुद्दों पर तीन दिन का व्हिप जारी किया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन विधेयकों को आगे बढ़ाती है या अगले सत्र के लिए टाल देती है।

















