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135 साल पुराना बैंकिंग कानून खत्म, डिजिटल रिकॉर्ड को मिलेगी कानूनी ताकत

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

नए कानून में बैंकिंग सबूत पेश करने की प्रक्रिया आसान; पुलिस को कुछ परिस्थितियों में बिना कोर्ट आदेश के खाते की जानकारी लेने का अधिकार

नई दिल्ली। देश में बैंकिंग रिकॉर्ड और उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर पेश करने से जुड़े 135 साल पुराने कानून की जगह अब नया कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। संसद ने इस महीने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य 1891 के पुराने कानून को डिजिटल बैंकिंग के दौर के अनुरूप बनाना और न्यायिक प्रक्रिया में बैंकिंग रिकॉर्ड के इस्तेमाल को अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनाना है।

डिजिटल रिकॉर्ड को मिलेगी मान्यता: नए कानून का सबसे बड़ा बदलाव इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से ‘बैंकर की किताब’ के दायरे में लाना है। अब बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुरक्षित किए गए खातों, लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड को निर्धारित शर्तें पूरी होने पर अदालत में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जा सकेगा। रिकॉर्ड की सटीकता और उसमें अनधिकृत बदलाव न होने की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

सर्टिफाइड कॉपी से काम आसान: अदालत में हर मामले में बैंक के मूल रिकॉर्ड पेश करने की जरूरत नहीं होगी। बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति या उससे निकाली गई प्रमाणित जानकारी को भी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन वाले मामलों में समय और संसाधनों की बचत होगी।

पुलिस को खाते की जानकारी लेने का प्रावधान: नए कानून में निर्धारित रैंक के पुलिस अधिकारियों को कुछ परिस्थितियों में बिना न्यायालय के आदेश के बैंक से ग्राहक के खाते की जानकारी मांगने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, सामान्य स्थिति में ग्राहक को इसकी सूचना देने का प्रावधान है। चल रही जांच, संगठित वित्तीय अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों में सूचना देने से छूट दी जा सकती है। इसी प्रावधान को लेकर निजता और निगरानी से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।

बैंक अधिकारियों को राहत: बैंक के खिलाफ सीधे मामला न होने पर अधिकारियों को केवल रिकॉर्ड प्रमाणित करने के लिए बार-बार अदालत में बुलाने से सुरक्षा मिलेगी। विशेष परिस्थितियों में अदालत रिकॉर्ड पेश करने या निरीक्षण का आदेश दे सकती है।

दायरा अन्य वित्तीय संस्थानों तक: केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार कानून का दायरा NBFC, बीमा कंपनियों, पेंशन फंड और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों तक बढ़ा सकेगी। इससे बदलते वित्तीय क्षेत्र के साथ कानून को अपडेट रखने की व्यवस्था बनेगी।

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