11 अक्तूबर से शुरू होंगे नवरात्र, मां दुर्गा का हाथी पर आगमन शुभता और समृद्धि का प्रतीक
अलीगढ़।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : शारदीय नवरात्र इस बार विशेष संयोग लेकर आ रहे हैं। पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले नवरात्र 11 अक्तूबर से प्रारंभ होकर 20 अक्तूबर तक चलेंगे। इस बार सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण नवरात्र नौ के बजाय 10 दिन के होंगे। वहीं, महानवमी और विजयदशमी की तिथियों के संयोग के चलते 20 अक्तूबर को महानवमी पूजन के बाद दशहरा मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जिसे सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सप्तमी दो दिन, दुर्लभ संयोग का योग
ज्योतिषाचार्य पं. अनूप कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार सप्तमी तिथि 17 और 18 अक्तूबर को सूर्योदय के समय विद्यमान रहेगी। इसी कारण सातवां नवरात्र दोनों दिन मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र की अवधि में इस तरह की वृद्धि को दुर्लभ और शुभ संयोग माना जाता है। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।
11 अक्तूबर को घट स्थापना
नवरात्र के पहले दिन 11 अक्तूबर को घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू होगी। दिए गए मुहूर्त के अनुसार, घट स्थापना का शुभ समय सुबह 7:46 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक बताया गया है। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापित कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
अष्टमी और नवमी पूजन की तिथियां
इस बार दुर्गा अष्टमी और महानवमी के पूजन को लेकर तिथियों का विशेष ध्यान रखना होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्तूबर को शुरू होकर 19 अक्तूबर की सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। उदयकाल में अष्टमी होने के कारण 19 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी पूजन मान्य होगा। वहीं, नवमी तिथि 19 अक्तूबर की सुबह 10:51 बजे से 20 अक्तूबर की दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। उदयकालीन नवमी के आधार पर 20 अक्तूबर को महानवमी पूजन किया जाएगा।
दशहरा पर होगा रावण दहन
विजयदशमी तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 12:50 बजे से शुरू होकर 21 अक्तूबर की दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण दहन दशमी तिथि में सांध्यकाल के दौरान किया जाता है। इस बार 20 अक्तूबर को सांध्यकालीन मुहूर्त मिलने के कारण इसी दिन दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन शस्त्र पूजन, विजयादशमी की पूजा और रावण दहन के आयोजन होंगे।
हाथी पर आगमन, मुर्गे पर प्रस्थान
ज्योतिषाचार्या रुचि कपूर के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं में गज वाहन को सुख-समृद्धि, खुशहाली और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, माता का प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे पर बताया गया है।
ऐसे करें घट स्थापना
ज्योतिषाचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार, घट स्थापना के लिए पूजा स्थल पर चौकी रखकर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें गंगाजल, शुद्ध जल, सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। इसके बाद कलश के मुख पर आम के पांच पत्ते रखकर नारियल स्थापित करें और विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन करें।
नवरात्र की प्रमुख तिथियां: 11 अक्तूबर—प्रतिपदा एवं मां शैलपुत्री; 12 अक्तूबर—द्वितीया एवं मां ब्रह्मचारिणी; 13 अक्तूबर—तृतीया एवं मां चंद्रघंटा; 14 अक्तूबर—चतुर्थी एवं मां कूष्मांडा; 15 अक्तूबर—पंचमी एवं मां स्कंदमाता; 16 अक्तूबर—षष्ठी एवं मां कात्यायनी; 17 और 18 अक्तूबर—सप्तमी एवं मां कालरात्रि; 19 अक्तूबर—अष्टमी एवं मां महागौरी; 20 अक्तूबर—महानवमी एवं मां सिद्धिदात्री के पूजन के बाद विजयदशमी।




















