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अटारी बॉर्डर बंद: जानें पाकिस्तान को इससे कितना नुकसान?

आतंकी हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ जुड़ा अटारी बॉर्डर बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय देश की सुरक्षा से जुड़ी कैबिनेट समिति द्वारा लिया गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि वैध दस्तावेजों के साथ जो लोग पहले से सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें 1 मई 2025 तक वापस लौटने की अनुमति दी गई है।

अटारी बॉर्डर का व्यापार में महत्व

अटारी बॉर्डर, जो अमृतसर से केवल 28 किलोमीटर दूर है, भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार का एकमात्र जमीनी रास्ता है। यह बॉर्डर 120 एकड़ में फैला हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग-1 से जुड़ा है। इसी रास्ते से भारत और अफगानिस्तान के बीच भी आयात-निर्यात होता है।

2023-24 में हुआ था ₹3,886.53 करोड़ का व्यापार

साल 2023-24 में अटारी-वाघा कॉरिडोर के जरिए 6,871 मालवाहक गाड़ियाँ गुजरीं और 71,563 लोगों ने इस रास्ते से यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल ₹3,886.53 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। भारत की तरफ से भेजी जाने वाली प्रमुख वस्तुएं हैं:

  • सोयाबीन
  • मुर्गे का दाना
  • सब्जियां
  • लाल मिर्च
  • प्लास्टिक के दाने
  • प्लास्टिक का धागा

जबकि पाकिस्तान और अन्य देशों से भारत में आने वाली वस्तुएं हैं:

  • सूखे मेवे
  • सूखे खजूर
  • जिप्सम
  • सीमेंट
  • सेंधा नमक
  • कांच
  • जड़ी-बूटियां

व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ सकता है गहरा असर

अटारी चेक पोस्ट के बंद होने से सबसे बड़ा असर उन छोटे और मध्यम व्यापारियों पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की वस्तुओं के आयात-निर्यात पर निर्भर हैं। यह फैसला न केवल भारत-पाक व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि अफगानिस्तान से आने वाले सामानों की आवाजाही पर भी असर डालेगा।

लॉजिस्टिक्स पर भी पड़ेगा असर

इस फैसले के कारण लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान के जरिए आने वाले माल की आवाजाही रुकने से सामान पहुंचाने में देरी हो सकती है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन लागत और समय दोनों बढ़ेंगे।

भारत द्वारा अटारी बॉर्डर बंद करने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम है, लेकिन इसका प्रभाव भारत-पाकिस्तान के व्यापार, सीमावर्ती कारोबार, और अफगानिस्तान के साथ आर्थिक संबंधों पर स्पष्ट रूप से देखा जाएगा। आने वाले समय में इसका समाधान खोजना सरकार और व्यापारिक संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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