हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 2 मई : 2025,
सरकार की पहल से खेती में आई क्रांति, तकनीकी मदद से बढ़ा उत्पादन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और योजनाओं का असर अब राज्य के खेत-खलिहानों में साफ देखा जा सकता है। राज्य सरकार किसानों को उन्नत किस्म के फल और सब्जी के पौधे उपलब्ध करा रही है, जिससे न केवल उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो रही है, बल्कि किसानों की आमदनी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
7 वर्षों में 150% की वृद्धि, फलों-सब्जियों की खेती में आया बूम
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में उत्तर प्रदेश में फल और सब्जी उत्पादन में करीब 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- फलों का रकबा 2016-17 में 4.75 लाख हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 5.92 लाख हेक्टेयर हो गया।
- फलों का उत्पादन 105 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 170.95 लाख मीट्रिक टन हो गया।
- सब्जियों की खेती 12.56 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 14.85 लाख हेक्टेयर हो गई।
- सब्जी उत्पादन 278 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 423.54 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया।
इसका मतलब है कि कुल मिलाकर राज्य में करीब 3.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर फल-सब्जी की खेती हो रही है और उत्पादन में 211 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है।
योगी सरकार कैसे बनी किसानों के लिए वरदान
राज्य के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के अनुसार, सरकार किसानों को नई तकनीक से तैयार की गई उन्नत किस्म की पौध स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करा रही है। इसके साथ-साथ उन्हें वैज्ञानिक खेती, प्रशिक्षण शिविर, और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है जिससे किसान आधुनिक पद्धतियों को अपना पा रहे हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर योगी सरकार गंभीर प्रयास कर रही है। सिर्फ खेती नहीं, बल्कि बागवानी, फूलों की खेती, कृषि निर्यात और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रदेश को बनाया जा रहा है कृषि के क्षेत्र में अग्रणी
भारत पहले ही दुनिया के सबसे बड़े फल और सब्जी उत्पादकों में शामिल है, लेकिन उत्तर प्रदेश अब इस दिशा में सबसे तेज़ी से आगे बढ़ता राज्य बन रहा है। सरकार ने कई योजनाओं को क्रियान्वित किया है:
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन
- कृषक प्रशिक्षण शिविर
- मंडी सुधार योजनाएं
- प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देना
इन सभी पहलों का लक्ष्य है कि किसान सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि विविध फसलों और आधुनिक तरीकों के ज़रिए अधिक लाभ कमा सकें।

















