हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 5 मई : 2025,
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के बाद अब माध्यमिक स्कूलों में भी गर्मी की छुट्टियों के दौरान समर कैंप आयोजित किए जाएंगे। राज्य सरकार ने राजकीय इंटर कॉलेजों में 21 मई से 10 जून तक समर कैंप चलाने के निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विविध शैक्षिक और सह-शैक्षिक गतिविधियाँ कराना है।
विभाग ने समर कैंप की तैयारियाँ शुरू कीं
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने समर कैंप की तैयारियों को लेकर स्कूलों को निर्देश भेज दिए हैं। साथ ही राज्य परियोजना निदेशालय ने मंडल स्तर पर टीमों का गठन भी कर दिया है, जो समर कैंप की गतिविधियों का निरीक्षण करेंगी। इन टीमों को 12 जून तक कम से कम दस राजकीय विद्यालयों (छह इंटर कॉलेज, चार हाईस्कूल व एक पीएमश्री स्कूल) का अनिवार्य निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
शिक्षकों में नाराजगी, आदेश का विरोध शुरू
सरकार के इस आदेश के बाद प्रदेश भर के शिक्षकों में नाराजगी देखी जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि भीषण गर्मी में समर कैंप चलाना न सिर्फ़ छात्रों बल्कि शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरे से खाली नहीं है।
भीषण गर्मी में कैंप संचालन को बताया अव्यवहारिक
राजकीय शिक्षक संघ ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा को पत्र भेजकर विरोध जताया है। पत्र में कहा गया है कि प्रयागराज सहित बुंदेलखंड और अन्य जिलों में तापमान अत्यधिक बढ़ चुका है और कई विद्यालयों में पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में समर कैंप कराना अव्यवहारिक है।
“एसी कमरों में बैठे अधिकारियों ने बनाई योजना”
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय और महामंत्री छाया शुक्ला ने आरोप लगाया कि ये योजना एसी कमरों में बैठकर बनाई गई है, जमीनी हकीकत से इसका कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, फिर भी समर कैंप कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
छुट्टियों में काम का मुआवजा – ईएल की मांग
शिक्षक संघ ने यह भी मांग की है कि यदि गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों से कार्य कराया जाता है, तो उन्हें राज्य कर्मचारियों की तरह अर्जित अवकाश (Earned Leave – EL) दिया जाए। बिना अतिरिक्त सुविधा और मुआवज़े के समर कैंप आयोजित करना अन्यायपूर्ण है।
















