हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
टोक्यो शिखर सम्मेलन में नई दिशा
टोक्यो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में भारत और जापान के बीच हुए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने कई अहम समझौते किए। माना जा रहा है कि इनसे भारत और जापान को रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में बड़े लाभ होंगे। खासतौर पर यह समझौता अमेरिकी ट्रंप टैरिफ के असर को कम करने में मददगार साबित होगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के साझा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर सहमति जताई। साथ ही मालाबार और जिमेक्स जैसे नौसैनिक अभ्यासों को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया। यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को नई मजबूती देगा।
5 लाख लोगों का आदान-प्रदान
समझौते के तहत भारत और जापान के बीच 5 लाख लोगों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षिक और तकनीकी रिश्ते गहरे होंगे।
स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग
भारत-जापान ने स्वच्छ ऊर्जा के लिए संयुक्त ऋण तंत्र शुरू करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, जहाज निर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया।शिक्षा और अनुसंधान का विस्तार
आईआईटी बॉम्बे और जापान के तोहोकू विश्वविद्यालय के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। इससे उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
जापान के पीएम की भारत पर टिप्पणी
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत वैश्विक बदलाव में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी शक्ति है, जबकि भारत मानव संसाधन और विशाल बाजार की ताकत रखता है। दोनों देशों की साझेदारी से नई ऊंचाइयां हासिल होंगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण
भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर बल दिया। दोनों देशों का मानना है कि कानून आधारित व्यवस्था से ही क्षेत्र में स्थिरता और विकास संभव है।