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अलीगढ़-पलवल सेक्शन में भू-अर्जन के लिए मुआवजा वितरण शिविर 24 मई से शुरू

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 23 मई : 2025

अलीगढ़, 23 मई 2025: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पंकज कुमार ने बताया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-334 के अलीगढ़-पलवल सेक्शन के निर्माण एवं चौड़ीकरण के तहत भू-अर्जन प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इस प्रक्रिया में तहसील कोल और खैर के कई ग्रामों के भू-स्वामी प्रभावित हुए हैं। अब इन भू-स्वामियों को उचित प्रतिकर (मुआवजा) की धनराशि वितरित की जाएगी।

प्रतिदिन अलग-अलग ग्रामों में शिविर लगाकर मुआवजा वितरण
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि मुआवजा वितरण की सुविधा के लिए विभिन्न तिथियों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रभावित ग्रामों के भू-स्वामियों को प्रत्यक्ष रूप से धनराशि दी जाएगी। इसके लिए क्षेत्रीय लेखपाल, भूमि अध्याप्ति अमीन एवं भूमि अध्याप्ति सहायक को भी तैनात किया गया है, जो इस कार्यवाही को शीघ्रता से पूरा करेंगे।

शिविर आयोजन की विस्तृत तिथियां और स्थान:

  • 24 मई: असरोई, पड़ील, मुकन्दपुर
  • 26 मई: लौहसरा विसावन, लोधा, अण्डला
  • 27 मई: करसुआ, बांकनेर, नगला अस्सू
  • 28 मई: रेसरी, इतवारपुर, गनेशपुर
  • 29 मई: जलालपुर, बुलाकीपुर, हीरपुरा
  • 30-31 मई: फाजिलपुर कलां, सोतीपुरा, उसरह रसूलपुर
  • 2 से 4 जून: खण्डेहा, टप्पल, घरबरा
  • 5 जून: हामिदपुर, स्यारौल, डोरपुरी
  • 6 जून: लोधा व लौहसरा विसावन

प्रतिकर वितरण में पारदर्शिता और अनुशासन:
अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुआवजा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और इस कार्य को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। तैनात कर्मचारियों को प्रतिदिन की कार्यवाही की रिपोर्ट उपजिलाधिकारी खैर को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि वितरण प्रक्रिया की निगरानी प्रभावी रूप से की जा सके।

राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का महत्व:
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-334 का चौड़ीकरण और निर्माण परियोजना से अलीगढ़ और पलवल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा, जिससे क्षेत्र के विकास को बल मिलेगा। इस कार्य से न केवल यातायात सुगमता बढ़ेगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

भू-अर्जन प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण:
राजमार्ग के चौड़ीकरण हेतु प्रभावित भूमि का अधिग्रहण किया गया है। अधिग्रहित भूमि के लिए प्रभावित भूमि मालिकों को सरकार द्वारा उचित मुआवजा दिया जाना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों ने भूमि मुआवजा निर्धारण के लिए सर्वे और मूल्यांकन कराकर एक न्यायसंगत राशि निर्धारित की है, जिसे अब शिविरों के माध्यम से सीधे भू-स्वामियों के खातों में या नकद वितरण के माध्यम से दिया जाएगा।

इस पहल से प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को उनके हक का भुगतान शीघ्र और व्यवस्थित तरीके से मिलेगा, जिससे उन्हें अन्य स्रोतों से मुआवजा पाने के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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