हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑15 मई : 2025
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)। प्यार की तलाश में सरहद पार करना एक युवक को भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के एक युवक को पाकिस्तान की अदालत ने बिना वीजा और पासपोर्ट के अवैध तरीके से सीमा पार करने के मामले में दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा और 5000 पाकिस्तानी रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। युवक की पहचान खिटकारी गांव निवासी बादल उर्फ बबलू के रूप में हुई है। वह सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती के बाद पाकिस्तान की युवती सना से मिलने के लिए अवैध रूप से पाकिस्तान पहुंच गया था।
बादल और पाकिस्तानी युवती सना की पहचान सोशल मीडिया पर हुई थी। पहले दोनों के बीच केवल बातचीत होती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने एक-दूसरे से जीवनभर साथ निभाने के वादे किए। इसी प्रेम में अंधा होकर बादल ने पाकिस्तान जाने का जोखिम उठा लिया। वह यह भूल गया कि यह केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि दो देशों के बीच तनाव से भरी एक संवेदनशील रेखा है।
जानकारी के मुताबिक, बादल 27 दिसंबर को पाकिस्तान में घुसते ही वहां की सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह पाकिस्तान सिर्फ अपनी प्रेमिका सना से मिलने आया था। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने उसे अदालत में पेश किया, जहां उस पर अवैध प्रवेश का मामला दर्ज किया गया।
पाकिस्तानी अदालत में सुनवाई के बाद उसे दोषी करार दिया गया और एक साल की जेल के साथ-साथ जुर्माने की सजा सुनाई गई। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि जिस सना के लिए बादल ने यह खतरनाक कदम उठाया था, उसने अब युवक से शादी करने से इनकार कर दिया है। इस इनकार ने बादल के परिजनों की चिंता और पीड़ा को और बढ़ा दिया है।
बादल की गिरफ्तारी की खबर उसके परिजनों को काफी समय बाद मिली। जब वह अचानक लापता हो गया तो परिजनों ने सोचा कि वह काम की तलाश में कहीं गया होगा। लेकिन जब कई दिनों तक उसका कोई अता-पता नहीं चला, तब चिंता बढ़ने लगी। बाद में जब पाकिस्तान की अदालत से बादल को सजा सुनाई गई, तब यह खबर भारत पहुंची और परिजनों को सच्चाई का पता चला।
इस खबर के सामने आते ही अलीगढ़ के खिटकारी गांव में सन्नाटा छा गया। गांव के लोग स्तब्ध हैं कि एक किसान परिवार का बेटा इस तरह की प्रेम कहानी में पड़कर पाकिस्तान जा पहुंचा और अब वहां जेल की सजा काट रहा है।
बादल के परिजन अब भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह पाकिस्तान सरकार से संपर्क कर उनके बेटे की रिहाई सुनिश्चित कराए। परिजनों का कहना है कि बादल ने कभी इस तरह के कदम की बात तक नहीं की थी, और न ही वह जानता था कि उसके फैसले का अंजाम इतना भयावह होगा।

















