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अलविदा स्वराज कौशल : देश के सबसे युवा राज्यपाल और जॉर्ज फर्नांडीस के विश्वसनीय सहयोगी

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

मिजोरम के पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सांसद एवं दिल्ली भाजपा की मंत्री बांसुरी स्वराज के पिता का अंतिम संस्कार 4 दिसंबर को लोधी रोड श्मशान घाट पर किया गया। स्वराज कौशल पूर्व विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज के पति थे और लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।

स्वराज कौशल ने एबीवीपी कार्यकर्ता रहीं सुषमा स्वराज से 1975 में शादी की थी। दोनों ही कांग्रेस विरोधी राजनीति से जुड़े रहे। जहां सुषमा आरएसएस पृष्ठभूमि से थीं, वहीं कौशल समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। दंपति की बेटी बांसुरी स्वराज नई दिल्ली सीट से भाजपा सांसद हैं। कौशल 1998 में राज्यसभा के सदस्य बने और 2000 से 2002 तक वे और सुषमा स्वराज दोनों एक साथ राज्यसभा में रहे।

कौशल उत्तर-पूर्व मामलों के जानकार माने जाते थे। उन्होंने अंडरग्राउंड मिजो लीडर लालडेंगा के साथ कई दौर की वार्ता की और मिजोरम शांति समझौते को संभव बनाया, जिससे दो दशक पुराना विद्रोह समाप्त हुआ। इसी योगदान के चलते उन्हें 1990 में मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वे उस समय देश के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और तीन वर्ष तक इस पद पर रहे।

इमरजेंसी के दौरान स्वराज कौशल की पहचान तेजतर्रार वकील के रूप में उभरकर सामने आई। उन्होंने समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस का बड़ौदा डायनामाइट केस में बचाव किया, जिसमें इंदिरा गांधी सरकार ने उन्हें सरकारी प्रतिष्ठानों और रेलवे पटरियों को उड़ाने की साजिश का आरोपी बनाया था। कौशल की पैरवी से फर्नांडीस को बड़ी राहत मिली और वे राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूती से उभरे।

स्वराज कौशल और सुषमा स्वराज ने सामाजिक मानदंडों को भी चुनौती दी। सुषमा के निधन पर उनकी बेटी बांसुरी ने उनका अंतिम संस्कार किया, जबकि सुषमा ने भी पहले अपने ससुर का अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार किया था। दोनों की मुलाकात पंजाब यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई के दौरान हुई थी, और जॉर्ज फर्नांडीस के केस के दौरान उनकी नजदीकियां और बढ़ीं। प्रारंभिक विरोध के बावजूद परिवार ने बाद में संबंध को स्वीकार किया और दोनों विवाह सूत्र में बंध गए।

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