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फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से मिली UP पुलिस की नौकरी, प्रतापगढ़ में 8 सिपाहियों पर मुकदमा

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

दो साल बाद खुला भर्ती घोटाला, एक महिला आरक्षी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ BNS की धाराओं में केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। वर्ष 2023 की सीधी भर्ती में चयनित एक महिला सहित आठ रिक्रूट आरक्षियों पर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, इन सभी अभ्यर्थियों ने भर्ती के दौरान स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी का लाभ लेने के लिए संदिग्ध प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। भर्ती प्रक्रिया के बाद दस्तावेजों की जांच में प्रमाणपत्रों पर संदेह हुआ, जिसके बाद विस्तृत सत्यापन कराया गया। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर संबंधित आरक्षियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

पूर्व RTC प्रभारी की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

इस मामले में पूर्व RTC प्रभारी दारोगा राजेश यादव की तहरीर पर नगर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच दारोगा अनुपम त्रिपाठी को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिवक्ता की शिकायत से खुला पूरा मामला

मामले की शुरुआत प्रयागराज निवासी अधिवक्ता अभयराज सिंह की शिकायत से हुई। उन्होंने शुभम दुबे नामक आरक्षी की भर्ती को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच बांदा जिले में कराई गई, जहां दस्तावेजों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। बाद में संबंधित आरक्षियों की तैनाती प्रतापगढ़ में होने के कारण पूरा प्रकरण वहां की पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया।

सभी आरोपी मिर्जापुर जिले के निवासी

पुलिस जांच में महिला समेत कुल आठ आरक्षियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। सभी आरोपी मिर्जापुर जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पांच जून को ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया था, लेकिन मामला सार्वजनिक रूप से अब सामने आया है। इसके बाद विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

प्रदेशव्यापी जांच की उठी मांग

घटना के बाद यह मांग भी उठने लगी है कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत प्रदेशभर में हुई भर्तियों की व्यापक जांच कराई जाए। जानकारों का मानना है कि यदि राज्य स्तर पर सत्यापन कराया जाए तो ऐसे कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।

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