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डोपिंग नेटवर्क पर सरकार का बड़ा प्रहार, संसद में आएगा सख्त कानून; एजेंटों और तस्करों पर होगी आपराधिक कार्रवाई

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग कानून में संशोधन की तैयारी, खिलाड़ियों नहीं बल्कि डोपिंग रैकेट चलाने वालों पर रहेगा कानून का शिकंजा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार खेलों में डोपिंग के बढ़ते खतरे पर लगाम कसने के लिए राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग कानून में बड़ा संशोधन करने जा रही है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने इसके लिए संशोधन का मसौदा तैयार कर सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। प्रस्तावित विधेयक को संसद के आगामी मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है।

प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य डोपिंग से जुड़े संगठित नेटवर्क, एजेंटों, तस्करों और प्रतिबंधित पदार्थों की गैर-कानूनी सप्लाई करने वाले गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई करना है। सरकार चाहती है कि परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री, वितरण और व्यावसायिक प्रचार जैसी गतिविधियों को आपराधिक अपराध की श्रेणी में लाया जाए। इन मामलों में सजा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के अनुरूप अपराध की गंभीरता के आधार पर तय की जाएगी।

खिलाड़ियों को नहीं बनाया जाएगा अपराधी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल डोप टेस्ट में पॉजिटिव आने या एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आधार पर किसी खिलाड़ी को अपराधी नहीं माना जाएगा। यदि किसी खिलाड़ी के डोपिंग रैकेट, तस्करी या संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने के ठोस सबूत मिलते हैं, तभी उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। अन्य मामलों में मौजूदा एंटी-डोपिंग नियम ही लागू रहेंगे।

इन गतिविधियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

प्रस्तावित कानून के तहत प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी, बिना अनुमति बिक्री और वितरण, खिलाड़ियों को डोपिंग के उद्देश्य से प्रतिबंधित पदार्थ उपलब्ध कराना, नाबालिग खिलाड़ियों को ऐसे पदार्थ देना, डोपिंग से जुड़े संगठित अपराध में शामिल होना, बिना निर्धारित लेबलिंग के प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री तथा डोपिंग को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन और पेड प्रमोशन को दंडनीय बनाया जाएगा।

संशोधनों में ‘थेराप्यूटिक यूज एक्जेप्शन (TUE)’ रखने वाले खिलाड़ियों और आपातकालीन चिकित्सा परिस्थितियों में प्रतिबंधित दवाएं देने वाले चिकित्सकों के लिए आवश्यक कानूनी सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है। मंत्रालय के अनुसार यह पहल UNESCO के अंतरराष्ट्रीय एंटी-डोपिंग कन्वेंशन और WADA की नीतियों के अनुरूप है। खेल मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से मसौदे पर सुझाव मांगे हैं, ताकि संसद में विधेयक पेश करने से पहले इसे अंतिम रूप दिया जा सके।

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