हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा पर बड़ा सवाल
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 पेपर लीक मामले ने पूरे देश को हिला दिया है। करीब 22 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को आखिरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को रद्द करना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें संगठित तरीके से छात्रों तक प्रश्न पहुंचाए गए।
राजस्थान से शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत राजस्थान से हुई। जांच एजेंसियों के अनुसार चूरू जिले का एक युवक, जो फिलहाल केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा है, सबसे पहले संदिग्ध प्रश्नपत्र तक पहुंचा। बताया जा रहा है कि सीकर के पिपराली रोड पर एसके कंसल्टेंसी चलाने वाला राकेश मंडावरिया इस नेटवर्क का अहम किरदार था।
सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल महीने में ही राकेश को एक “क्वेश्चन बैंक” मिल गया था। इस क्वेश्चन बैंक में वही सवाल शामिल थे जो बाद में असली परीक्षा में पूछे गए। यह सामग्री चूरू के युवक के जरिए केरल से राजस्थान पहुंची थी।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम से फैला पेपर
जांच में यह भी सामने आया कि राकेश मंडावरिया ने अपने पीजी में रहने वाले छात्रों को यह पेपर उपलब्ध कराया। इसके बाद अलग-अलग व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए पेपर तेजी से कई राज्यों में फैल गया।
राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार तक यह नेटवर्क सक्रिय था। महाराष्ट्र के नासिक जिले में भी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचने की बात सामने आई है। वहीं हरियाणा और उत्तराखंड के कुछ परीक्षा केंद्रों तक भी लीक पेपर पहुंचने के संकेत मिले हैं।
कैसे पकड़ा गया मास्टरमाइंड?
NEET परीक्षा खत्म होने के बाद राकेश मंडावरिया ने खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जब राजस्थान पुलिस ने उससे पूछताछ की कि उसे प्रश्नपत्र कहां से मिला, तब उसने चूरू के उस युवक का नाम बताया जो केरल में MBBS कर रहा था।
इसके बाद पुलिस ने केरल पहुंचकर उससे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने “मनीष” नाम के व्यक्ति का खुलासा किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि जयपुर से पकड़ा गया मनीष ही इस पूरे पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड हो सकता है।
प्रिंटिंग से पहले ही लीक हुआ पेपर
एसओजी सूत्रों के अनुसार, जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि NEET का पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक कर दिया गया था। जांच में बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू मिलने की बात सामने आई है।
सूत्रों का दावा है कि मनीष का अपना प्रिंटिंग प्रेस भी है और उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लीक सवालों को दूसरे सवालों के साथ जोड़कर एक “क्वेश्चन बैंक” तैयार किया था। यही क्वेश्चन बैंक बाद में छात्रों के बीच बेचा गया।
पैसों के बदले बेचा गया पेपर
पूछताछ में कई छात्रों ने माना कि उन्होंने प्रश्नपत्र पाने के लिए पैसे दिए थे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि एक छात्र से कितनी रकम ली गई थी। पुलिस अब पैसों के लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है।
डिजिटल सबूतों से खुल रहे राज
राजस्थान पुलिस और एसओजी अब व्हाट्सएप चैट, टेलीग्राम ग्रुप और मोबाइल डेटा के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर मनीष तक पेपर पहुंचा कैसे और उसके संपर्क किन-किन राज्यों में थे।
सूत्रों का कहना है कि इस बार जांच एजेंसियों के पास डिजिटल सबूत काफी मजबूत हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
CBI करेगी पूरे नेटवर्क की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है। अब एजेंसी यह पता लगाएगी कि पेपर लीक में कौन-कौन लोग शामिल थे, किस स्तर पर सुरक्षा में चूक हुई और क्या इसमें किसी बड़े संगठित गिरोह का हाथ था।
NEET पेपर लीक मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर अब CBI जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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