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नवरात्र: 27 साल बाद 10 दिन होगी मां की आराधना

शुभ रंग और पूजा सामग्री
आज नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। मां को लाल रंग बहुत प्रिय है। भक्त पूजा के समय लाल और गुलाबी वस्त्र धारण करें। पूजा में नारियल, मीठा पान और लाल चुनरी अर्पित करना शुभ माना जाता है। कलश में गंगाजल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम और चांदी का सिक्का डालकर आम के पत्तों और नारियल से सजाएं। पूजा के दौरान फल-फूल अर्पित करें।

शैलपुत्री का महत्व
मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं, इसलिए इन्हें शैलपुत्री कहा गया। पूर्व जन्म में सती नाम से जानी गईं, उनका विवाह भगवान शिव से हुआ। प्रजापति दक्ष के यज्ञ में सती ने अपने शरीर को भस्म कर दिया और अगले जन्म में हिमालय की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। नवदुर्गाओं में शैलपुत्री का प्रथम स्थान है। उनका पूजन करने से संतान सुख, धन-वैभव और सर्वफल प्राप्ति होती है।

शारदीय नवरात्र का समय और विशेषताएं
इस वर्ष नवरात्र सोमवार, 22 सितंबर से प्रारंभ होकर 1 अक्टूबर तक होंगे। 2 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी। 27 साल बाद शारदीय नवरात्र दस दिन तक मनाया जा रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मां शैलपुत्री हाथी की सवारी पर पधारेंगी, जो शांति, सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक है।

विशेष तिथियां और योग
तीसरी नवरात्र 24 और 25 सितंबर को होगी, जो तृतीया तिथि के अद्भुत योग के कारण अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दौरान कृषि उत्पादन में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं में कमी की संभावना होती है। 24 सितंबर को महालक्ष्मी राजयोग का योग बनेगा, जब चंद्रमा और मंगल तुला राशि में होंगे। इसके अलावा गजकेसरी योग, शुक्ल योग और कई दिनों तक रवि योग भी रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल है।

घट स्थापना और पूजा विधि
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त 22 सितंबर को प्रातः 06:09 से 07:29 (अमृत चौघड़िया), 09:10 से 10:41 (शुभ चौघड़िया) और 01:47 से 02:36 (अभिजीत मुहूर्त) हैं। राहुकाल सुबह 7:30 से 9 बजे तक है, इस दौरान घट स्थापना वर्जित है। पूजा के लिए घर के ईशान कोण में लाल वस्त्र बिछा कर लकड़ी की चौकी पर देवी की प्रतिमा स्थापित करें। व्रत और संकल्प लेकर धूप, दीप, पुष्प, फल और मिष्ठान से नियमित पूजा करें।

नवरात्र में देवी स्वरूप

  • प्रतिपदा (22 सितंबर): शैलपुत्री
  • द्वितीया (23 सितंबर): ब्रह्मचारिणी
  • तृतीया (24-25 सितंबर): चंद्रघंटा
  • चतुर्थी (26 सितंबर): कूष्मांडा
  • पंचमी (27 सितंबर): स्कंदमाता
  • षष्ठी (28 सितंबर): कात्यायनी
  • सप्तमी (29 सितंबर): कालरात्रि
  • अष्टमी (30 सितंबर): महागौरी (कन्या पूजन)
  • नवमी (1 अक्टूबर): सिद्धिदात्री (कन्या पूजन)

मां शैलपुत्री की आराधना से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन की ऊर्जा बनी रहती है। भक्तों को इस दिन विशेष फल और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

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