हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 12 मई : 2025,
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित हो रही पार्किंगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नगर विकास विभाग ने राज्य सरकार की मंजूरी के बाद एक नई पार्किंग नियमावली जारी की है, जिसके तहत अब अवैध पार्किंग पकड़े जाने पर न्यूनतम ₹5000 तक का जुर्माना देना होगा। यह नियम फिलहाल पहले चरण में नगर निगम वाले शहरों में लागू किया गया है।
अवैध पार्किंग पर कसेगा शिकंजा
राज्य सरकार की नई नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाना और अवैध पार्किंग माफियाओं पर नकेल कसना है। अक्सर देखा गया है कि कई शहरों में नगर निकाय अधिकारियों की मिलीभगत से बिना लाइसेंस के पार्किंग का धंधा बेरोकटोक चलता है। लेकिन अब ऐसा करना आसान नहीं होगा।
नई नियमावली के तहत अवैध पार्किंग स्थल की अवधि, उसके जरिए होने वाली आमदनी और स्थान की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जुर्माने की राशि तय की जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
नगर आयुक्त को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई की पूरी ज़िम्मेदारी नगर आयुक्त को दी गई है। नगर निगम अधिनियम के अंतर्गत उन्हें यह अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे स्थलों की पहचान कर कार्रवाई करें और जुर्माना वसूलें। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि किस स्थान पर कितने दिनों से अवैध पार्किंग संचालित हो रही थी और उससे कितनी कमाई की गई।
लाइसेंसधारी भी आएंगे दायरे में
केवल अवैध पार्किंग ही नहीं, बल्कि जो लोग वैध लाइसेंस लेकर पार्किंग चला रहे हैं और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियम उल्लंघन की स्थिति में उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। इसके लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति निरीक्षण करेगी।
जनभागीदारी से होगा निरीक्षण
नगर निगमों की ओर से बनाई गई टीम शहर के सभी पार्किंग स्थलों का भ्रमण करेगी और आम लोगों से फीडबैक भी लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पार्किंग व्यवस्था पारदर्शी, सुरक्षित और सुविधाजनक हो।

















