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शीतकालीन सत्र में दस विधेयक लाने की तैयारी, असैन्य परमाणु क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुलेगा

नई दिल्ली, हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होने जा रहा है और सरकार ने इस सत्र के लिए अपने विधायी एजेंडे को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। कुल 15 कार्य दिवसों वाले इस सत्र में सरकार 10 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें सबसे अधिक चर्चा में परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 है, जिसके माध्यम से पहली बार निजी कंपनियों के लिए असैन्य परमाणु क्षेत्र खोले जाने का प्रस्ताव शामिल है। यह विधेयक भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और विनियमन को नियंत्रित करने के लिए बनाया जा रहा है।

सरकार के एजेंडे में उच्च शिक्षा आयोग विधेयक भी प्रमुख है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देना और उत्कृष्टता बढ़ाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना है। यह विधेयक देश में एक सशक्त उच्च शिक्षा आयोग के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा।

इसी तरह प्रतिभूति बाजार संहिता (एसएमसी) विधेयक, 2025 भी इस सत्र में पेश किया जाएगा। यह तीन प्रमुख कानूनों—सेबी अधिनियम 1992, डिपॉजिटरी अधिनियम 1996 और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम 1956—को मिलाकर एक एकीकृत संहिता बनाने का प्रावधान करता है।

सरकार मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में संशोधन लाने की भी योजना बना रही है। अधिकारियों के अनुसार, धारा 34 में प्रस्तावित संशोधन और कंपनी निदेशकों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के चलते इस मुद्दे को समिति के पास भेजा गया है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक भी सूचीबद्ध है, जिसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। वहीं कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 कंपनी अधिनियम 2013 और एलएलपी अधिनियम 2008 में बदलाव कर व्यवसाय करने में आसानी सुनिश्चित करेगा।

इस सत्र में राजनीतिक गर्मी भी देखने को मिलेगी। विपक्ष बिहार चुनाव परिणामों के मद्देनज़र एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जिसके कामकाज पर चर्चा नहीं की जा सकती।

19 दिसंबर को समाप्त होने वाले इस सत्र से पहले पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, जिसका असर सत्र की बहसों पर भी दिखने की संभावना है। कुल मिलाकर, सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि उसके पास सत्र के लिए व्यापक एजेंडा है और वह इसे गंभीरता से ले रही है।

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