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राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, प्रधान सहायक अजय पाल सिंह यादव निलंबित

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑15 मई : 2025

अलीगढ़। राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय में पदस्थापित प्रधान सहायक अजय पाल सिंह यादव पर गंभीर आरोप लगने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ जांच की जिम्मेदारी आगरा जिले के आंवलाखेड़ा स्थित राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. यशोधरा शर्मा को सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनसे एक माह के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई ने शैक्षिक व प्रशासकीय हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि अजय पाल सिंह यादव के साथ-साथ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ भी एक साथ कार्रवाई की गई है। ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह कार्रवाई किसी बड़े मामले का हिस्सा है या दोनों प्रकरण आपस में जुड़े हुए हैं।

अजय पाल सिंह यादव की मूल नियुक्ति अलीगढ़ के अतरौली क्षेत्र स्थित वीरांगना अवन्तीबाई राजकीय महाविद्यालय में प्रधान सहायक के पद पर हुई थी। उन्हें वहां से प्रतिनियुक्ति पर राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय में प्रधान सहायक के रूप में भेजा गया था। विश्वविद्यालय में कार्यरत रहते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगे, जिनकी पुष्टि जांच के दौरान हुई।

वीरांगना अवन्तीबाई राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अफरोज आलम द्वारा जारी निलंबन आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अजय पाल सिंह यादव पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति के हैं। इसलिए प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है। निलंबन के पश्चात उन्हें राजकीय महाविद्यालय गोंडा, इगलास से सम्बद्ध कर दिया गया है।

राजकीय महाविद्यालय, आंवलाखेड़ा, आगरा की प्राचार्य डॉ. यशोधरा शर्मा को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे एक महीने के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में और कड़ी कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।

विश्वविद्यालय में एक ही समय पर परीक्षा नियंत्रक और प्रधान सहायक पर कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों का कहना है कि यह कोई सामान्य अनुशासनात्मक मामला नहीं हो सकता। उच्च स्तर पर किसी व्यापक अनियमितता या भ्रष्टाचार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, शिक्षा विभाग की नजरें इस जांच पर टिकी हुई हैं। आने वाले समय में जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोनों अधिकारियों पर की गई कार्रवाई एक स्वतंत्र अनुशासनिक कदम थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश अथवा मिलीभगत का मामला है।

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