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उत्तर प्रदेश : अब घर की रसोई से सीधे बाज़ार तक — महिला उद्यमिता को पंख दे रही है योगी सरकार की योजना

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 13 मई : 2025,

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ स्वाद के जादू तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि अपने हुनर को व्यवस्थित खाद्य व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के माध्यम से घरेलू महिलाओं और पारंपरिक खाद्य कारीगरों को उद्यमिता की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में तेज़ी से कार्य कर रही है।

121.91 करोड़ की योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा सहारा

इस योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार ने कुल 121.91 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इसका उद्देश्य छोटे खाद्य उत्पादकों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और आधुनिक मशीनों के जरिये सशक्त बनाना है।

  • 84.91 करोड़ रुपये उद्यमियों को सब्सिडी के रूप में दिए जाएंगे।
  • 24 करोड़ रुपये मशीनों की खरीद पर खर्च होंगे।
  • 3.5 करोड़ रुपये प्रशिक्षण और प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित हैं।
  • 9.5 करोड़ रुपये व्यावसायिक सेवाओं के लिए और
  • 19.5 करोड़ रुपये अन्य मदों में खर्च किए जाएंगे।

यह योजना केंद्र और राज्य सरकार की साझा पहल है, जिसका क्रियान्वयन प्रदेश के विभिन्न जिलों में युद्धस्तर पर हो रहा है।

स्वाद, हुनर और ब्रांडिंग का संगम

इस योजना का लाभ उन महिलाओं को मिल रहा है, जो वर्षों से अपने घरों में अचार, पापड़, मसाले, जैविक खाद्य पदार्थ आदि बनाकर स्वरोजगार की राह तलाश रही थीं। अब इन्हें आधुनिक मशीनों, पैकेजिंग तकनीक, मार्केटिंग रणनीतियों और ब्रांडिंग की मदद से एक व्यवस्थित उद्यम खड़ा करने का अवसर मिल रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि घरेलू उत्पाद सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित न रहें, बल्कि देश और विदेश के बाज़ारों में भी इनकी मजबूत पहचान बने। महिलाओं को मार्केट एक्सेस, बिक्री के मंच और सरकारी योजनाओं से जुड़ने में भी सहयोग दिया जा रहा है।

महिला सशक्तीकरण और सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि जब ग्रामीण महिलाएं अपने हाथों से बने खाद्य उत्पादों को व्यावसायिक रूप देंगी, तो इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनका आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा। यह योजना महज आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी वाहक है।

योजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और असंगठित खाद्य उत्पादकों को औपचारिक रूप से जोड़कर उन्हें स्थायी और संगठित उद्यमों में बदलना था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना को ज़मीन पर उतारते हुए महिलाओं को प्राथमिकता दी है।

रसोई से निकलकर बनेंगी खाद्य व्यवसाय की अगुआ

अब उत्तर प्रदेश की महिलाएं सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहेंगी। वे खाद्य उद्यमी के रूप में अपने गांव, जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगी। प्रदेश सरकार के इस प्रयास से एक ओर जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक सशक्त कदम साबित होगी।

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