हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
अगस्त में हिमालयी क्षेत्र में 130 भूकंपीय घटनाएं दर्ज, भारत के हिमालयी हिस्से में 63 झटके; ज्यादातर कम तीव्रता के, लेकिन लद्दाख में 5.5 तीव्रता के भूकंप ने बढ़ाई चिंता
अलीगढ़। हिमालयी क्षेत्र में अगस्त महीने के दौरान भूकंपीय गतिविधियों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) की मंथली रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में पूरे हिमालयी क्षेत्र और उससे जुड़े हिंदुकुश-पामीर इलाके में 130 से अधिक भूकंपीय घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज्यादा 63 घटनाएं भारत के हिमालयी क्षेत्र में रिकॉर्ड की गईं। हालांकि ज्यादातर भूकंप कम तीव्रता वाले रहे, लेकिन लगातार सामने आ रही भूकंपीय गतिविधियों ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NCS के आंकड़ों के अनुसार, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में 36 भूकंप दर्ज किए गए। वहीं अफगानिस्तान में 26 और नेपाल में 10 भूकंपीय घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में अधिकांश झटके माइल्ड कैटेगरी के रहे, जिनसे बड़े स्तर पर नुकसान की सूचना नहीं है। इसके बावजूद 13 अगस्त को लद्दाख में आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने विशेषज्ञों और प्रशासन का ध्यान खींचा। इसी दिन 4.3 तीव्रता का एक और भूकंप भी दर्ज किया गया।
यह भूकंपीय गतिविधि ऐसे समय सामने आई है, जब नेपाल हाल ही में भीषण बाढ़ और सैलाब की त्रासदी से जूझ रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी हैं। कई स्थानों पर मलबे से शवों की तलाश की जा रही है और स्निफर डॉग की मदद ली जा रही है। वहीं लांगटांग सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए भारतीय और नेपाली बचाव दल अभियान चला रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक महीने में अधिक संख्या में भूकंप दर्ज होना अपने आप में किसी बड़े भूकंप की निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। हिमालय भूगर्भीय रूप से बेहद सक्रिय क्षेत्र है और यहां धरती के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल होती रहती है। ऐसे में छोटे-छोटे भूकंप तनाव के सामान्य रूप से निकलने की प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकते हैं। फिर भी लगातार निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा तैयारी बेहद जरूरी है।
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