प्रयागराज में गंगा-यमुना उफान पर, वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु के पार; गाजीपुर में 2000 भेड़ों का छह घंटे में रेस्क्यू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के करीब 19 जिलों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बना हुआ है। गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, मंदाकिनी और शारदा समेत कई नदियां उफान पर हैं। कई जगह निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत और बचाव टीमों को अलर्ट कर दिया है।
प्रभावित और संवेदनशील जिलों में लखीमपुर खीरी, चित्रकूट, पीलीभीत, कुशीनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, बहराइच, गोरखपुर, बदायूं, देवरिया, उन्नाव, फर्रुखाबाद, बरेली, बाराबंकी और प्रयागराज शामिल हैं। वहीं गाजीपुर और वाराणसी में भी नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा

प्रयागराज में पिछले दो दिनों से गंगा और यमुना समेत सहायक नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। विभिन्न बैराज और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण टोंस नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए टोंस और बेलन नदी के कछारी इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। उन्होंने बताया कि गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, हालांकि फिलहाल किसी आबादी के प्रभावित होने की सूचना नहीं है। एहतियात के तौर पर राहत शिविर सक्रिय कर दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें भी निगरानी कर रही हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी फिर उफान पर
चित्रकूट में लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। कुछ दिन पहले आई भीषण बाढ़ के बाद नदी का पानी कम होने लगा था, लेकिन रात में हुई बारिश के बाद हालात फिर बदल गए। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री वितरित की।
प्रशासन के मुताबिक, मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब तीन मीटर ऊपर पहुंच गया था।
गाजीपुर में फंसीं 2000 भेड़ें, छह घंटे चला रेस्क्यू

गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने से करीब 2000 भेड़ें और उनके पालक बाढ़ के पानी के बीच फंस गए। रात में भेड़ पालक ने पुलिस से मदद मांगी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने ड्रोन की मदद से फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नाविकों और गोताखोरों की चार टीमों को अभियान में लगाया गया। करीब छह घंटे चले अभियान के बाद सभी भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
प्रशासन के अनुसार प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ चौकियों और आश्रय स्थलों को सक्रिय रखने के साथ लोगों के लिए भोजन-पानी और पशुओं के चारे की व्यवस्था की जा रही है।
श्रावस्ती में एक दर्जन से ज्यादा घरों में घुसा पानी
श्रावस्ती के गिलौला कस्बे में लगातार बारिश के चलते जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण पुरानी मस्जिद के पीछे रहने वाले लोगों के घरों में बारिश का पानी घुस गया। पहले गलियों में पानी जमा हुआ और बाद में आसपास के मकानों में पहुंच गया। देखते ही देखते एक दर्जन से ज्यादा घर जलमग्न हो गए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई घरों में कमर तक पानी भर गया। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोगों ने प्रशासन से पानी की जल्द निकासी और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
पीलीभीत में शारदा नदी खतरे के करीब
पीलीभीत में लगातार बारिश के बीच शारदा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। परिगांव के पास नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। बनबसा बैराज से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
पूरनपुर तहसील क्षेत्र के नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
वाराणसी में चेतावनी बिंदु के पार पहुंची गंगा
वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया है। मंगलवार सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 70.27 मीटर दर्ज किया गया। लगातार बारिश के बीच वरुणा नदी के किनारे बसे 12 मोहल्लों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। 150 से अधिक परिवार राहत शिविरों में शरण ले चुके हैं, जबकि कई प्रभावित परिवार परिचितों के घर या किराए के मकानों में रह रहे हैं।
प्रशासन प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है। राहत शिविरों में दिन में तीन बार भोजन दिया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध और केले की भी व्यवस्था की गई है।
अगस्त में 35 साल बाद इतनी बारिश
वाराणसी में इस बार अगस्त में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई। आंकड़ों के अनुसार अगस्त में सामान्य बारिश करीब 245.1 मिलीमीटर रहती है, जबकि इस वर्ष करीब 448 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 82 प्रतिशत अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले 48 घंटे तक बादल छाए रहने और बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
गंडक बढ़ी तो महाराजगंज-कुशीनगर में बढ़ी निगरानी
नेपाल में बाढ़ के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से महाराजगंज और कुशीनगर में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। दोनों जिलों में नदी तंत्र पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
लखीमपुर खीरी, गोंडा, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, बहराइच, गोरखपुर, देवरिया, उन्नाव, फर्रुखाबाद, बरेली और बाराबंकी समेत अन्य जिलों में भी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। लोगों से नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है। राहत शिविरों को तैयार रखने के साथ जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद लेने की तैयारी है। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर और आगामी बारिश को लेकर है।














