हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
रिपोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य को बनाया बड़ा मुद्दा
नई दिल्ली। NEET-UG को लेकर देशभर में जारी विवाद अब केवल पेपर लीक और परीक्षा की पारदर्शिता तक सीमित नहीं रह गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और CJP (Cockroach Justice Platform) के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट ने परीक्षा के बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
पांच साल में 93 आत्महत्या के मामले
मेडिकल डायलॉग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच NEET से जुड़े तनाव के कारण कम से कम 93 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें 2025 सबसे चिंताजनक वर्ष रहा, जब 32 छात्रों ने जान गंवाई। वहीं 2026 में अब तक 14 मामले दर्ज होने का दावा किया गया है। हालांकि ये आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा नहीं हैं।
तमिलनाडु में सबसे अधिक मामले
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2018 से 2020 के बीच विश्लेषित 32 मामलों में सबसे अधिक 15 मामले तमिलनाडु से थे। अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश मामलों में परीक्षा का दबाव, असफलता का डर और पारिवारिक अपेक्षाएं मानसिक तनाव की प्रमुख वजह बनीं।
परीक्षा सुधार की मांग तेज
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और अनिश्चितता ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया है। प्रदर्शनकारी पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, जवाबदेही तय करने और छात्रों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की मांग कर रहे हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू हुई है, लेकिन आंदोलन अभी जारी है।














