हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ शुक्रवार 6 जून 2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में हो रही देरी ने पार्टी के अंदर असंतोष और सवालों को जन्म दे दिया है। करीब पौने दो वर्ष पहले प्रदेश अध्यक्ष पद संभालने वाले अजय राय ने पहले कार्यकाल की शुरुआत के तीन माह के भीतर कार्यकारिणी का गठन कर लिया था, जिसमें 16 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव और 76 सचिव शामिल थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर चल रही खींचतान और खेमेबंदी इस देरी की प्रमुख वजह मानी जा रही है। दिसंबर 2024 में पार्टी ने सभी कमेटियों को भंग कर संगठनात्मक पुनर्गठन की शुरुआत की थी, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है।
मार्च 2025 में कांग्रेस ने जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा की थी, जिससे प्रदेश कार्यकारिणी गठन की उम्मीदें जगी थीं। लेकिन कुछ नियुक्तियों को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी सामने आई और विरोध की आवाजें प्रदेश मुख्यालय तक गूंजीं। इसके बाद नामों पर नए सिरे से विचार-विमर्श शुरू हुआ।
पार्टी अब सामाजिक और आंतरिक समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी है, ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जा सके। लेकिन उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव पदों को लेकर अब तक आम सहमति नहीं बन पाई है।
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने हाल ही में ऐलान किया कि कांग्रेस आगामी पंचायत चुनावों में सपा से अलग होकर अकेले मैदान में उतरेगी। इसके तहत पार्टी ने जिला, मंडल, ब्लॉक, पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की योजना बनाई है, जिसमें पांच स्तरों पर पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। वरिष्ठ नेताओं को समन्वयक की भूमिका भी सौंपी गई है।
हालांकि, प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में हो रही देरी से यह अभियान प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जब तक शीर्ष टीम गठित नहीं होगी, तब तक निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन में ऊर्जा भरना मुश्किल होगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आलाकमान ने वरिष्ठ नेताओं से सुझाव मांगे हैं और जल्द ही प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की जा सकती है। लेकिन यह स्पष्ट है कि कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती और एकजुटता की बड़ी चुनौती से जूझना पड़ रहा है।
















