डा. असगर वजाहत ने उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपक्रम को सराहा
हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: अलीगढ़, 27 मार्च – अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के आधुनिक भारतीय भाषाओं विभाग में ‘नाथ संप्रदाय अते योग एक संवाद’ विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पत्रकार एवं अनुवादक दीप जगदीप सिंह ने कहा कि नाथ साहित्य का पंजाबी साहित्य और संस्कृति पर गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में पृथ्वी और मानव स्वास्थ्य पर बढ़ते संकट को समझने और दूर करने में नाथ साहित्य और योग अभ्यास की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
नाथ संप्रदाय पर पुस्तक का विमोचन
इस समारोह में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर तथा प्रसिद्ध लेखक डा. असगर वजाहत, फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन डा. टी.एन. सतीशन, हिंदी विभाग के प्रोफेसर वेद प्रकाश, पंजाबी सेक्शन के प्रमुख डा. क्रांतिपाल और उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी, लखनऊ के कार्यक्रम कोऑर्डिनेटर अरविंद नारायण मिश्रा ने डा. दया सिंह पंजाबी द्वारा लिखित पंजाबी पुस्तक ‘नाथ संप्रदाय अते योग’ का विमोचन किया।
पुस्तक के लेखक डा. दया सिंह ने यह शोध-आधारित पुस्तक अपने सुपरवाइजर डा. क्रांतिपाल के मार्गदर्शन में तैयार की है। इसे उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी द्वारा प्रकाशित किया गया है।
नाथ संप्रदाय और पंजाबी साहित्य का संबंध
इस अवसर पर डा. असगर वजाहत ने कहा कि नाथ परंपरा का पंजाबी साहित्य और संस्कृति के साथ गहरा संबंध है। उन्होंने सराहना की कि डा. दया सिंह ने सरल भाषा में इस विषय पर किताब लिखकर नई पीढ़ी को पंजाब की ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया है।
पत्रकार दीप जगदीप सिंह ने अपने शोध-पत्र में कहा कि नाथ साहित्य को पंजाबी साहित्य के इतिहास में आदि-साहित्य के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि गुरु नानक साहिब ने सिद्ध-गोष्ठी के माध्यम से नाथ संप्रदाय के साथ एक गहन संवाद किया था, जिससे नाथ संप्रदाय में सुधारवादी लहर प्रारंभ हुई थी।
जाति प्रथा को चुनौती देता नाथ संप्रदाय
हिंदी विभाग के प्रोफेसर वेद प्रकाश ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि नाथ संप्रदाय उस समय की प्रचलित सामाजिक धारा के विरुद्ध एक आंदोलन के रूप में उभरा था। इसमें वे लोग शामिल हुए जो जातिवादी समाज में निम्न पायदान पर माने जाते थे। नाथ संप्रदाय ने जाति विभाजन को चुनौती दी और अपने धार्मिक अनुष्ठानों में बाहरी पुजारियों की बजाय स्वयं ही विधि-विधान का पालन किया।
उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी की पहल
उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के कार्यक्रम समन्वयक अरविंद नारायण मिश्रा ने कहा कि अकादमी पंजाबी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य कर रही है। निर्देशक ओम प्रकाश सिंह के नेतृत्व में अकादमी पंजाबी भाषी लोगों को उनकी मातृभाषा से जोड़ने के प्रयासों में लगी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अकादमी भविष्य में भी मूल्यवान पंजाबी साहित्य प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शोधार्थियों की उपलब्धि
फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के डीन एवं आधुनिक भारतीय भाषाएँ विभाग के चेयरमैन डा. टी.एन. सतीशन ने लेखक डा. दया सिंह को इस महत्वपूर्ण पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि एएमयू के शोधार्थी अपने शोध कार्यों के माध्यम से अकादमिक क्षेत्र में विशेष पहचान बना रहे हैं।
समारोह का संचालन मराठी सेक्शन के इंचार्ज ताहिर एच. पठान ने किया, जबकि आयोजन सचिव एवं पंजाबी सेक्शन के इंचार्ज डा. क्रांतिपाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारतीय भाषाएँ विभाग भारत की सात भाषाओं का संगम स्थल है।















