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ड्रोन से लेकर डार्क वेब तक: भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ क्या है?

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

भारत सरकार ने आतंकवाद के बदलते स्वरूप को देखते हुए अपनी पहली व्यापक एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी की है। Ministry of Home Affairs (MHA) द्वारा जारी इस रणनीतिक दस्तावेज का उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद, साइबर हमलों, ड्रोन के दुरुपयोग और नई तकनीकों के जरिए उभरते खतरों से प्रभावी ढंग से निपटना है। यह नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ के सिद्धांत पर आधारित है और आतंकवाद को किसी धर्म, जाति या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ती।

खतरे की नई रूपरेखा: सीमा पार से साइबर स्पेस तक

पॉलिसी में सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को बड़ी चुनौती बताया गया है। इसमें Al-Qaeda और Islamic State (ISIS) जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों का उल्लेख है, जो स्लीपर सेल और स्थानीय नेटवर्क के जरिए हिंसा भड़काने की कोशिश करते रहे हैं।

दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि आतंकवादी संगठन अब सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल फंडिंग और प्रोपेगैंडा के लिए कर रहे हैं। ड्रोन और रोबोटिक्स का दुरुपयोग, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में, गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।

इसके अलावा CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) खतरों को भी उभरती चुनौती माना गया है।

काउंटर टेरर स्ट्रैटेजी: सात स्तंभों पर आधारित ढांचा

1. हमलों की रोकथाम

इंटेलिजेंस-गाइडेड प्रिवेंटिव अप्रोच के तहत मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए रियल टाइम सूचना साझा की जाएगी। आतंक फंडिंग और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) पर सख्त कार्रवाई होगी।

2. त्वरित प्रतिक्रिया

स्थानीय पुलिस को प्रथम प्रतिक्रिया बल माना गया है, जबकि बड़ी घटनाओं में National Security Guard (NSG) की तैनाती की जाएगी। जांच की जिम्मेदारी National Investigation Agency (NIA) को सौंपी जाएगी।

3. क्षमताओं का समेकन

सुरक्षा एजेंसियों के आधुनिकीकरण, आधुनिक हथियारों की खरीद और विशेष प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। राज्यों की ATS यूनिट्स को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

4. मानवाधिकार संरक्षण

नीति में स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद विरोधी कानूनों में मानवाधिकारों की रक्षा की जाएगी। Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) को मुख्य कानूनी आधार बताया गया है और सुप्रीम कोर्ट तक बहु-स्तरीय राहत व्यवस्था सुनिश्चित है।

5. डी-रेडिकलाइजेशन और सामुदायिक भागीदारी

कट्टरपंथ रोकने के लिए समुदाय और धार्मिक नेताओं की भागीदारी, युवाओं के लिए शिक्षा-रोजगार योजनाएं तथा जेलों में विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

6. अंतरराष्ट्रीय सहयोग

MLAT, प्रत्यर्पण संधि और संयुक्त राष्ट्र में आतंकियों की सूचीबद्धता जैसे प्रयासों के जरिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

7. रिकवरी और रेजिलिएंस

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और विश्वास बहाली पर जोर दिया गया है।

आगे की राह

PRAHAAR को एक समन्वित फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो कानूनी, तकनीकी और सामुदायिक उपायों को जोड़ता है। भविष्य में कानूनों में संशोधन, तकनीकी निवेश और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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