हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
खामेनेई की मौत के बाद लारीजानी का तीखा बयान
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान अपने नेता और लोगों के खून का बदला जरूर लेगा। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में लारीजानी ने कहा कि ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लगातार लेगा।
लारीजानी ने एक अन्य पोस्ट में ईरान के पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने इलाके का इस्तेमाल करने दिया तो ईरान को खुद कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ट्रंप ने धमकियों को बताया बेअसर
लारीजानी की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों और धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया। सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह लारीजानी को जानते तक नहीं हैं और उन्हें इन बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ता।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान पहले ही इस संघर्ष में हार चुका है और अमेरिका के हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक तेहरान बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं कर देता। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान में कई हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में हमले शुरू कर दिए।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने दुबई, बहरीन, कुवैत और कतर सहित कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे भारी नुकसान हुआ। साथ ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।
मिनाब स्कूल हमले को लेकर विवाद
इस बीच दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। इस हमले में 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश बच्चे बताए जा रहे हैं।
ट्रंप ने इस घटना में अमेरिका की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि यह हमला ईरान की एक त्रुटिपूर्ण मिसाइल के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों सीएनएन, न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की जांच में अलग तस्वीर सामने आई है। उपग्रह चित्रों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्टों में कहा गया है कि 28 फरवरी को आईआरजीसी ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के दौरान यह स्कूल भी निशाने पर आ गया था।
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