हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
राज्यसभा में सरकार का बड़ा खुलासा
राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) फिलहाल लगभग 64% तक भरे हुए हैं। इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) के पास करीब 3.372 मिलियन टन कच्चा तेल स्टॉक में मौजूद है, जो आपात स्थिति में सप्लाई बाधित होने पर सुरक्षा कवच का काम करेगा।
आयात पर भारी निर्भरता
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, अपनी लगभग 88% तेल जरूरतें आयात से पूरी करता है। वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में देश ने 226 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जिस पर करीब 110 अरब डॉलर खर्च हुए। यह आयात 41 देशों से किया जा रहा है, जिनमें मिडिल ईस्ट के पारंपरिक सप्लायर के साथ अमेरिका और अफ्रीकी देश भी शामिल हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ती चिंता
इस आयात का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के जरिए आता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। LPG का 85-95% और गैस का लगभग 30% भी इसी रास्ते से भारत पहुंचता है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस रूट पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
रणनीतिक भंडार और विस्तार योजना
भारत ने Visakhapatnam, Mangaluru और Padur में 5.33 मिलियन टन क्षमता वाले भूमिगत भंडार बनाए हैं। इसके अलावा ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पाडुर में 6.5 मिलियन टन क्षमता के नए प्रोजेक्ट भी मंजूर किए गए हैं।
सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन पर जोर
सरकार ने एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए तेल स्रोतों में विविधता बढ़ाई है। रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ाकर जोखिम कम करने की कोशिश की जा रही है।
कुल स्टोरेज 74 दिन की जरूरत के बराबर
भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता (सरकारी + कंपनियां) करीब 74 दिनों की मांग पूरी कर सकती है, जिससे किसी भी वैश्विक संकट में देश को राहत मिल सके।
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