हिन्दुस्तान मिरर न्यूज
ऊर्जा संकट से चरमराई व्यवस्था
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर Sri Lanka पर पड़ा है। पेट्रोल-डीजल की भारी कमी के कारण देश की परिवहन व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। हालात इतने गंभीर हो गए कि सरकार को बिजली बचाने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े, जिनमें चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करना भी शामिल है। सड़कों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर सन्नाटा नजर आ रहा है।
भारत ने निभाया पड़ोसी धर्म
संकट की इस घड़ी में India ने एक भरोसेमंद साथी की भूमिका निभाई है। Narendra Modi और Anura Kumara Dissanayake के बीच बातचीत के बाद भारत ने तुरंत राहत भेजी। ‘लंका IOC’ के माध्यम से 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल की खेप Colombo पहुंचाई गई। इस मदद के लिए श्रीलंका सरकार ने भारत का आभार जताया है।
आम जीवन पर गहरा असर
ईंधन संकट ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। बिजली खपत में 25% कटौती का लक्ष्य तय किया गया है। स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी गई हैं और सरकारी कर्मचारियों को एसी के बजाय पंखे इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को रात में चार्जिंग से बचने के निर्देश दिए गए हैं। कई निजी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है।
भारत की नीति की सराहना
श्रीलंका के नेताओं ने भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की सराहना की है। सांसद Namal Rajapaksa ने भारत के फ्यूल टैक्स मॉडल को अपनाने की सलाह दी है, ताकि संकट के समय नागरिकों पर बोझ कम किया जा सके।
रूस से भी बातचीत जारी
दीर्घकालिक समाधान के लिए श्रीलंका अब Russia से भी तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है। वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
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