हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली: केंद्र सरकार 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पारित करने की तैयारी में है। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है। हालांकि, विपक्ष के विरोध और अचानक बुलाए गए सत्र ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
क्या है संशोधन बिल का मुख्य उद्देश्य?
नारी शक्ति वंदन बिल का मूल लक्ष्य महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देना है। 2023 में पारित कानून में यह प्रावधान था कि आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी होगा। लेकिन अब संशोधन के जरिए सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि आरक्षण जल्द लागू हो सके।
जल्दबाजी के पीछे क्या कारण?
सरकार की इस तेजी को केवल सामाजिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने के लिए यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां Mamata Banerjee और Dravida Munnetra Kazhagam की महिला-हितैषी नीतियों का मजबूत प्रभाव है, वहां बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इस रणनीति के पीछे Narendra Modi सरकार का चुनावी समीकरण भी अहम माना जा रहा है।
सीटों में बढ़ोतरी और आरक्षण का गणित
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 816 की जा सकती है। इसमें से 33% यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
इसके अलावा, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सीटों में भी 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। SC सीटें 84 से बढ़कर 126 और ST सीटें 47 से बढ़कर 70 हो सकती हैं। इनमें भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया
इस संशोधन में यह प्रावधान किया जा सकता है कि महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण लॉटरी सिस्टम के जरिए तय होगा, जिसकी वैधता 15 वर्षों तक रहेगी। इसके बाद सीटों का पुनः निर्धारण किया जा सकेगा।
सरकार का प्रयास है कि किसी भी स्थिति में 2029 तक महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए, भले ही नई जनगणना में देरी क्यों न हो।
राजनीतिक असर और विपक्ष की चिंता
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस बिल को जल्दबाजी में केवल चुनावी लाभ के लिए ला रही है। उनका कहना है कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के यह प्रक्रिया अधूरी और असंतुलित हो सकती है।
वहीं सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है।
नारी शक्ति वंदन संशोधन बिल एक तरफ महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बड़ा कदम है, तो दूसरी तरफ इसके पीछे चुनावी रणनीति की झलक भी साफ दिखाई देती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बिल वास्तव में सामाजिक बदलाव लाता है या राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बनकर रह जाता है।
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