हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अमेरिका के इशारे पर आगे आया इस्लामाबाद
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश करता दिखा, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स ने उसकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपनी मर्जी से नहीं बल्कि White House के दबाव में सीजफायर प्रस्ताव आगे बढ़ाया। इससे साफ है कि पाकिस्तान एक स्वतंत्र मध्यस्थ नहीं बल्कि अमेरिका का संदेशवाहक बना हुआ था।
40 दिन चुप, फिर अचानक एक्टिव
मिडिल ईस्ट में करीब 40 दिनों तक तनाव और हमलों का दौर जारी रहा, जिसमें ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया। इस दौरान पाकिस्तान पूरी तरह खामोश रहा। लेकिन जैसे ही अमेरिका ने पहल की, पाकिस्तान अचानक सक्रिय हो गया। इससे उसकी मंशा और भूमिका दोनों पर संदेह गहराता है।
शहबाज शरीफ की पोस्ट से खुली पोल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की सोशल मीडिया पोस्ट भी विवाद का कारण बनी। उनकी पोस्ट की एडिट हिस्ट्री से संकेत मिला कि बयान पहले से तय स्क्रिप्ट के अनुसार बदले गए थे। इससे यह शक और गहरा गया कि पाकिस्तान की कूटनीतिक लाइन कहीं और से तय हो रही है।
चीन और अमेरिका की असली भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिए कि ईरान को मनाने में चीन की अहम भूमिका रही। साथ ही The New York Times की रिपोर्ट में भी बताया गया कि चीन ने दबाव बनाकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार किया। ऐसे में पाकिस्तान का रोल सीमित ही नजर आता है।
आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान
पाकिस्तान इस समय भारी कर्ज में डूबा है। IMF, वर्ल्ड बैंक और अन्य संस्थाओं का अरबों डॉलर का कर्ज उस पर है। खुद रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने आर्थिक हालात को गंभीर बताया है। ऐसे में पाकिस्तान की कोशिश है कि कूटनीतिक सक्रियता के जरिए आर्थिक मदद हासिल की जाए।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान तनाव में पाकिस्तान की भूमिका ‘पीसमेकर’ से ज्यादा ‘मोहरा’ जैसी नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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