हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सेतु बनने की कोशिश में जुट गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात कर मौजूदा हालात पर चर्चा की।
45 मिनट की बातचीत में क्षेत्रीय हालात पर चर्चा
दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय तनाव और शांति प्रयासों पर विचार-विमर्श किया गया। पाकिस्तान ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के साथ हुई हालिया कूटनीतिक बातचीत की जानकारी भी साझा की। इस वार्ता को सकारात्मक और सहयोगात्मक बताया गया।
ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचकर ईरान से वार्ता करेगा। हालांकि, ईरान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी सरकारी एजेंसी IRNA ने इन खबरों को भ्रामक बताया है।
ईरान की शर्त: पहले नाकेबंदी हटे
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह वार्ता में तभी शामिल होगा, जब अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। ईरान को आशंका है कि बातचीत के बाद भी प्रतिबंध नहीं हटेंगे और उसके फंसे हुए आर्थिक संसाधन वापस नहीं मिलेंगे।
सुरक्षा परिषद की बैठक, भरोसे की कमी
इस मुद्दे पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी हो चुकी है। ईरान को यह भी डर है कि यह कूटनीतिक चाल हो सकती है, क्योंकि पूर्व में भी वार्ता के बाद तनाव बढ़ा है।
22 अप्रैल को खत्म होगा युद्धविराम
इससे पहले 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहली वार्ता हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब 22 अप्रैल को खत्म हो रहे युद्धविराम को बढ़ाने की उम्मीद इस दूसरे दौर की वार्ता से जुड़ी हुई है।
पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका
शहबाज शरीफ ने ईरान को पहले दौर में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया और शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की बात कही। इस दौरान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका का भी उल्लेख किया गया।
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