हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़
नई दिल्ली/केरल: सीमा शुल्क विभाग ने ‘ऑपरेशन नुमखोर’ के तहत एक बड़े तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें भूटान के रास्ते भारत में 15,000 से अधिक लग्जरी कारों को अवैध रूप से लाया गया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए इन वाहनों का पंजीकरण कराकर सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।

छोटी जांच से खुला बड़ा घोटाला
शुरुआत में केरल में 35-40 लग्जरी कारों की जांच की जा रही थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह संख्या बढ़कर 15,849 तक पहुंच गई। इससे साफ हुआ कि यह एक संगठित और बड़े स्तर का नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय था।
फर्जी दस्तावेजों का जाल
जांच में सामने आया कि इन गाड़ियों को फर्जी ‘डिस्पोजल सर्टिफिकेट’ के आधार पर पंजीकृत कराया गया। कई वाहनों को सेना की पुरानी गाड़ियां दिखाकर रजिस्ट्रेशन कराया गया, जबकि कुछ के लिए विदेशी दूतावास और विदेश मंत्रालय के नकली कागजात तैयार किए गए, ताकि भारी कस्टम ड्यूटी से बचा जा सके। ये दस्तावेज इतने उच्च गुणवत्ता के थे कि पहली नजर में असली लगते थे।
फिल्मी सितारे भी रडार पर
इस मामले में कई मशहूर हस्तियों और फिल्मी सितारों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम में 464 वाहनों का फर्जी पंजीकरण पाया गया, जबकि केरल में 50 से अधिक गाड़ियां जब्त की गई हैं।
डिजिटल ऑडिट से खुली पोल
यह पूरा मामला ‘नेशनल व्हीकल रजिस्ट्री’ के डिजिटल ऑडिट के दौरान सामने आया। डेटा में गड़बड़ियों ने अधिकारियों को सतर्क किया, जिसके बाद गहन जांच शुरू की गई और इस बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
सख्ती की तैयारी
तस्करी रोकने के लिए भारत और भूटान के सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच केरल के मुन्नार में बैठक आयोजित की गई है। इसमें अवैध रूप से लाई गई SUV और लग्जरी गाड़ियों पर शिकंजा कसने और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर चर्चा हो रही है।
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