हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
मध्यपूर्व में बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुआ सीजफायर अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनने की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन नई सैन्य रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
नई रणनीति: छोटे लेकिन असरदार हमले
सूत्रों के मुताबिक, CENTCOM ने ईरान के खिलाफ “छोटे और शक्तिशाली हमलों” की योजना तैयार की है। इस रणनीति के तहत ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है। उद्देश्य यह है कि दबाव बढ़ाकर ईरान को परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए मजबूर किया जाए।
होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की योजना
एक अन्य अहम विकल्प होर्मुज स्ट्रेट के एक हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करने का है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका इसे सुरक्षित कर कमर्शियल शिपिंग को सुचारू करने की योजना बना रहा है, जिसमें ग्राउंड फोर्स की तैनाती भी संभव है।
स्पेशल फोर्स ऑपरेशन की संभावना
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए स्पेशल फोर्स ऑपरेशन पर विचार किया जा सकता है। यह कदम सीधे तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है।
हाइपरसोनिक मिसाइल तैनाती की तैयारी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने “डार्क ईगल” हाइपरसोनिक मिसाइल को मिडिल ईस्ट भेजने की मांग की है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका इस तरह की अत्याधुनिक मिसाइल तैनात करेगा। यह कदम रूस और चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है।
निष्कर्ष: बढ़ सकती है वैश्विक चिंता
अगर ये योजनाएं लागू होती हैं, तो मध्यपूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इससे न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
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