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चुनावी हार के बाद बढ़ीं ममता बनर्जी की मुश्किलें
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक संकट और गहरा गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के सामने एक ओर पार्टी को एकजुट बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच उनके भतीजे Abhishek Banerjee तक पहुंचती दिखाई दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस सौंपा।
15 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया
सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों के हाथ में एक फाइल थी, जिस पर समन लिखा हुआ था। एजेंसी शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच के सिलसिले में पहुंची थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक अभिषेक बनर्जी को 15 जून को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इससे पहले भी भर्ती घोटाले को लेकर कई नेताओं और अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है।
‘असली टीएमसी’ को लेकर बढ़ी सियासी जंग
इधर टीएमसी के भीतर असली पार्टी होने के दावे को लेकर भी संघर्ष तेज हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष Rathindranath Bose ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी है। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उन्हें 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
58 विधायकों के समर्थन का दावा
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुने गए 58 विधायक विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल का हिस्सा हैं और उन्होंने इन विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। उन्होंने बताया कि चार उपनेताओं और मुख्य सचेतक की नियुक्ति भी की गई है। ऋतब्रत ने कहा कि उनकी टीम सदन के भीतर और बाहर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेगी।
जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने का दावा
ऋतब्रत ने कहा कि विपक्षी विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर मिला और वे एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार जनता के हित में सकारात्मक कार्य करती है तो उसकी सराहना करने में भी उन्हें कोई संकोच नहीं होगा। इस बीच, ईडी की कार्रवाई और पार्टी के अंदरूनी विवाद ने टीएमसी के लिए नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
















