हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
पूर्वोत्तर की 9 सीटों पर फोकस, छोटे दलों से बढ़ा रहा कुनबा
नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पहले ही क्षेत्र की 25 लोकसभा सीटों में से 16 पर कब्जा रखता है, लेकिन अब उसकी नजर विपक्ष और तटस्थ क्षेत्रीय दलों के पास मौजूद 9 सीटों पर है।
मिजोरम की सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने हाल ही में संसद में एनडीए सरकार को मुद्दा-आधारित समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी के एक लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद के समर्थन को भाजपा की रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा अब मेघालय की वीपीपी समेत अन्य क्षेत्रीय दलों को भी अपने करीब लाने की कोशिश में जुटी है।
संख्या बल बढ़ाने के लिए अपनाए जा रहे पांच मॉडल
भाजपा केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि संसद के भीतर अपना संख्याबल मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए पार्टी पांच प्रमुख रणनीतियों पर काम कर रही है। इनमें विपक्षी सांसदों को सीधे भाजपा में शामिल कराना, राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे, सहयोगी दलों का विस्तार, छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ नए समीकरण बनाना और विपक्षी दलों में बागी गुटों को मान्यता दिलाना शामिल है।
NDA में बदला शक्ति संतुलन
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के पास 240 सांसद थे और टीडीपी तथा जेडीयू उसके प्रमुख सहयोगी थे। हालांकि बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों में कई दलों और सांसदों के समर्थन से एनडीए का आंतरिक शक्ति संतुलन बदल गया। महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे गुट) को अतिरिक्त सांसदों का समर्थन मिला, जबकि अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ भी भाजपा की नजदीकियां बढ़ी हैं।
दो-तिहाई बहुमत है अंतिम लक्ष्य
भाजपा का लक्ष्य केवल सरकार चलाने लायक बहुमत बनाए रखना नहीं, बल्कि संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचना है। इसके लिए पूर्वोत्तर समेत विभिन्न राज्यों के छोटे दलों और विपक्षी गुटों को साधने की रणनीति पर तेजी से काम किया जा रहा है।
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