हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
SIT जांच में खुली सरकारी जमीन पर कब्जे और जालसाजी की बड़ी साजिश, फर्जी बैनामे से वर्षों तक वसूला किराया
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सरकारी संपत्ति पर कब्जा और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाखों रुपये का मुआवजा हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विशेष जांच समिति (SIT) की जांच में खुलासा हुआ कि कुछ लोगों ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के सरकारी आवास की भूमि पर फर्जी मालिकाना हक का दावा कर करीब 28.45 लाख रुपये का मुआवजा और किराया वसूल लिया। रिपोर्ट के आधार पर थाना सिविल लाइंस में सात नामजद समेत अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
ब्रिटिश काल से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है भूमि
SIT की जांच में सामने आया कि ग्राम छावनी स्थित गाटा संख्या-455A पर बना SSP आवास ब्रिटिश शासनकाल से सरकारी संपत्ति के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद आरोपियों ने वर्ष 1900 का कथित फर्जी बैनामा तैयार कर जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा किया। जांच में बैनामे में दर्ज विवरण और सरकारी रिकॉर्ड में भी कई गंभीर विसंगतियां मिलीं।
फर्जी दस्तावेजों से हासिल किया मुआवजा
जांच के अनुसार मुख्य आरोपी सुधीर कुमार धवन ने वर्ष 2002 का एक कथित विभागीय पत्र भी तैयार कराया, जिसे विशेष शाखा, लखनऊ से जारी बताया गया। सत्यापन में यह पत्र पूरी तरह फर्जी निकला। आरोप है कि इसी आधार पर आवास एवं विकास परिषद से करीब 28.45 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त किया गया और सरकारी भूमि को निजी बताकर वर्षों तक किराया भी वसूला गया। आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी बैनामों के जरिए भूमि अन्य लोगों के नाम भी दर्ज कराई।
पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी
एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों में आरोपियों का कोई वैध मालिकाना हक नहीं मिला। SIT रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ तथा अवैध मुआवजा दिलाने में शामिल पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















