हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
घायल महिला यात्री से कथित अवैध वसूली के विरोध में शुरू हुआ विवाद, रेलवे ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हीराकुंड एक्सप्रेस (20808) के ठहराव के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के एक जवान और डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (डिप्टी एसएस) के बीच हुई मारपीट से स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए रेलवे प्रशासन ने प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर चार आरपीएफ जवानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब ट्रेन में यात्रा कर रही एक महिला यात्री घायल हो गई। यात्री की स्थिति को देखते हुए ऑपरेटिंग विभाग के डिप्टी स्टेशन अधीक्षक ने ट्रेन को कुछ देर रोकने का निर्णय लिया। इसी दौरान आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान जितेंद्र ने घायल महिला को रोककर उससे कथित रूप से पैसे वसूलने का प्रयास किया।
डिप्टी एसएस ने जब इस कथित अवैध वसूली का विरोध किया तो दोनों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच घटना को लेकर हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद अन्य कर्मचारियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी आरपीएफ जवान जितेंद्र का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है और जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही है।
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में अनुशासनहीनता और ड्यूटी के दौरान अमर्यादित व्यवहार के आरोपों के आधार पर चार आरपीएफ जवानों को निलंबित कर दिया गया। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एएससी (ASC), एडीईई/ओपी (ADEE/OP) और एओएम (AOM) को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

















