हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र में लोंगजू समेत कई रणनीतिक स्थान दर्ज
नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के लगातार नाम बदलने के प्रयासों के बीच भारत ने कड़ा
जवाब दिया है। सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और
भौगोलिक विशेषताओं के मानक नाम शामिल किए गए हैं। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी)
के पास स्थित लोंगजू समेत कई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस
कदम का उद्देश्य इन स्थानों की आधिकारिक पहचान को मजबूत करना और आम लोगों के बीच इनके
बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
लोंगजू और महत्वपूर्ण दर्रे भी मानचित्र में शामिल
आधिकारिक सूची में अपर सुबनसिरी जिले का लोंगजू और उसके पास स्थित माजा गांव शामिल हैं।
लोंगजू 1959 में भारत-चीन के शुरुआती टकराव वाले क्षेत्रों में रहा है। इसके अलावा बिसा गांव तथा
ड्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे महत्वपूर्ण पर्वतीय दरों को भी भारतीय मानचित्र में जगह दी गई
है।
रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थाग ला को भी सूची में शामिल किया गया है। वर्ष 1962 के भारत-चीन
युद्ध के शुरुआती संघर्षों में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण रहा था।
जयरामपुर से तवांग रोड तक कई क्षेत्र दर्ज
सूची में चांगलांग जिले का जयरामपुर भी शामिल है, जिसे पूर्वी सीमा क्षेत्र का महत्वपूर्ण रसद केंद्र माना
जाता है। इसके अलावा शंभू सरोवर, बड़ा कुंडुन, छोटा कुंडुन, धन बाड़ी, प्रीतनगर और तेरितनगर जैसे
क्षेत्रों को भी आधिकारिक पहचान दी गई है।
तवांग रोड स्थित रामनगर जसवंतगढ़, जहां शहीद जसवंत सिंह रावत का स्मारक है, के साथ सागर,
पद्मा, ज्योतिनगर और बैसाखी गांव भी सूची में शामिल हैं। शेर-ए-थापा स्मारक, छोटा रोपुक, बड़ा
रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर भी इसमें दर्ज किए गए हैं।
चीन ने तीन बार जारी की नामों की सूची
चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है और वहां के भारतीय क्षेत्रों के लिए काल्पनिक नाम जारी
करता रहा है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में छह स्थानों के नामों की पहली सूची जारी
की थी। इसके बाद 2021 में 15 और 2023 में 11 स्थानों के नामों की सूची जारी की गई।
भारत ने चीन की इस कार्रवाई को लगातार निरर्थक और बेतुका बताते हुए खारिज किया है। भारत का
स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न … T था, है और रहेगा। आधिकारिक भारतीय
मानचित्र में इन क्षेत्रों को शामिल करना इसी दावे का पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।













