पश्चिम एशिया के तनाव के बीच मोदी-पेजेश्कियान मुलाकात से चाबहार और INSTC पर नजर, अमेरिका-इजरायल के साथ भी रणनीतिक रिश्ते कायम
नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव के बीच भारत ने अपनी विदेश नीति में संतुलन का स्पष्ट संकेत दिया है। BRICS के मंच पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मौजूदगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात को इसी रणनीति के अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि भारत एक ओर ईरान के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर UAE और सऊदी अरब के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा साझेदारी तथा अमेरिका और इजरायल के साथ रणनीतिक रिश्ते भी कायम रखे हुए है।
12 दिन में मोदी-पेजेश्कियान की दूसरी मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की करीब 12 दिन के भीतर दूसरी मुलाकात हुई। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को बिश्केक में मिले थे। युद्ध शुरू होने के बाद पेजेश्कियान की भारत यात्रा को खास महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने BRICS के मंच से बहुपक्षीय सहयोग और एकतरफा वैश्विक व्यवस्था के मुकाबले की जरूरत पर जोर दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने भारत के मुश्किल समय में साथ खड़े रहने के लिए आभार भी जताया।
चाबहार भारत की रणनीतिक प्राथमिकता
भारत-ईरान संबंधों में चाबहार बंदरगाह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। मई 2024 में भारत और ईरान के बीच शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 वर्ष का समझौता हुआ था। इसके तहत भारत ने निवेश और क्रेडिट सुविधा का प्रावधान किया है। चाबहार के जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए मध्य एशिया और रूस तक व्यापारिक पहुंच मजबूत करना चाहता है।
इसी से जुड़ा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भारत के लिए महत्वपूर्ण है। करीब 7,200 किलोमीटर लंबा यह मल्टीमॉडल रूट समुद्री, रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए भारत को ईरान, मध्य एशिया और रूस से जोड़ने की क्षमता रखता है। आगे यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी यह मार्ग उपयोगी हो सकता है।
ग्वादर के मुकाबले चाबहार का अलग रणनीतिक मॉडल
भारत के लिए चाबहार केवल व्यापारिक बंदरगाह नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक संतुलन का साधन है। दूसरी ओर पाकिस्तान में चीन का ग्वादर बंदरगाह CPEC का प्रमुख हिस्सा है। चाबहार के जरिए भारत मध्य एशिया और रूस की ओर पहुंच बनाता है, जबकि ग्वादर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के जरिए चीन से जुड़ता है। ऐसे में दोनों बंदरगाहों को क्षेत्रीय प्रभाव और कनेक्टिविटी की प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
तेल-गैस और होर्मुज संकट पर भी नजर
ईरान के साथ भारत के रिश्तों में ऊर्जा सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। ईरान से कच्चे तेल और LPG की संभावित आपूर्ति भारत के लिए विकल्प बढ़ा सकती है, लेकिन अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध बड़ी चुनौती हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट में तनाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सीधा जोखिम है। ऐसे में वैकल्पिक व्यापार मार्गों को मजबूत करना भारत की रणनीतिक जरूरत बन गया है।
कुल मिलाकर, भारत पश्चिम एशिया में किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय सभी प्रमुख पक्षों से संवाद बनाए रख रहा है। ईरान के साथ चाबहार और कनेक्टिविटी, खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा व निवेश और अमेरिका-इजरायल के साथ रणनीतिक सहयोग—यह संतुलन भारत के व्यापक राष्ट्रीय हितों को साधने की कोशिश है।
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