उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश, 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन विकल्प देने होंगे
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद में चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है। आयोग का यह आदेश पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
आयोग के अनुसार उसके सामने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में और दूसरा अरूप रॉय के नेतृत्व में है। दोनों पक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि मूल विवाद पर निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत निर्णय की आवश्यकता है। फिलहाल उपचुनावों के मद्देनजर अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।
आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक अपने लिए तीन-तीन नाम प्राथमिकता क्रम में सुझाएं। आयोग इनमें से किसी एक नाम को संबंधित गुट के लिए मंजूरी दे सकता है। दोनों गुटों को उम्मीदवारों के लिए तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह भी प्राथमिकता के क्रम में बताने होंगे। इनमें से आयोग संबंधित गुट के उम्मीदवारों के लिए एक चिन्ह आवंटित करेगा।
यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव तक लागू रहेगी। दोनों गुटों को जरूरत पड़ने पर अपने नए नाम में मूल पार्टी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से संबंध का उल्लेख करने की अनुमति होगी।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर यह अंतिम फैसला नहीं है। पैरा 15 के तहत दोनों पक्षों के दावों, संगठनात्मक ढांचे और पार्टी पर नियंत्रण के संबंध में विस्तृत सुनवाई के बाद मूल विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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