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इटावा कथावाचक विवाद पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘जातिवाद छोड़ राष्ट्रवाद अपनाएं’

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: शनिवार 28 जून 2025

उत्तर प्रदेश के इटावा में 21 जून को एक कथावाचक के साथ हुए अमर्यादित व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है।

विदेश यात्रा से लौटने पर जताया दुख
धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि वे 25 दिन की विदेश यात्रा पर थे। लौटने पर उन्हें इटावा की घटना की जानकारी मिली, जिससे वे बेहद दुखी हैं। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “हमारे विदेश प्रवास के दौरान भारत में कई घटनाएं हुईं, जिनमें इटावा में कथावाचक के साथ दुर्व्यवहार बेहद विचित्र और दुखद है।”

‘जाति नहीं, भगवान का नाम है पहचान’
बागेश्वर धाम सरकार ने कहा, “वेदव्यास, वाल्मीकि, मीरा, सूरदास, कबीरदास जैसे संतों की न जाति पूछी गई, न पता। उनकी भक्ति और भगवान का नाम ही उनकी पहचान बना। भगवान की कथा और सनातन धर्म का विचार किसी जाति विशेष तक सीमित नहीं है। भगवान का नाम गाने और कथा कहने का अधिकार सभी को है।”

‘हिंदू राष्ट्र के लिए जातिवाद से ऊपर उठें’
धीरेंद्र शास्त्री ने जोर देकर कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए जातिवाद को छोड़कर राष्ट्रवाद की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, “गुरुनानक, मीराबाई, रैदास, कबीरदास, सभी ने भगवान राम और श्याम की भक्ति की। इसमें कुछ गलत नहीं है। अगर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है, तो जाति-पाति का भेदभाव छोड़ना होगा।”

‘कानून का सहारा लें, खुद जज न बनें’
इटावा की घटना को निंदनीय बताते हुए शास्त्री ने कहा, “अगर कथावाचक ने कोई अपराध किया है, तो कानून और न्यायपालिका का सहारा लेना चाहिए। खुद को न्यायपालिका बनाकर विद्रोह और जातिवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। जो राजनेता जाति के नाम पर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं, उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना होगा।”

नवंबर में पदयात्रा का ऐलान
धीरेंद्र शास्त्री ने ऐलान किया कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने और जातिवाद से ऊपर उठाने के लिए वे 7 से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन तक पदयात्रा करेंगे। उन्होंने कहा, “इस यात्रा का उद्देश्य हिंदू समाज को जागृत करना और छुआछूत व जातिगत भेदभाव को खत्म करना है।”

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