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बंगाल चुनाव: बीरभूम से मुर्शिदाबाद तक बवाल,केंद्रीय बलों से झड़प और पत्थरबाजी

पहले चरण की वोटिंग के दौरान भड़की अशांति
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के दौरान गुरुवार को बीरभूम और मुर्शिदाबाद जिलों में हिंसा और अशांति की घटनाएं सामने आईं। मतदान के बीच ईवीएम में कथित गड़बड़ी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। हालात इतने बिगड़ गए कि कई स्थानों पर तोड़फोड़, पत्थरबाजी और केंद्रीय बलों के साथ झड़प की घटनाएं हुईं। प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

खैराशोल में EVM को लेकर विवाद
बीरभूम जिले के खैराशोल ब्लॉक के बुधपुर गांव स्थित बूथ नंबर 65 पर विवाद की शुरुआत हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में बटन दबा रहे थे, लेकिन वोट भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा रहा था। बताया गया कि लगभग 200 वोट पड़ने के बाद इस गड़बड़ी का शक हुआ, जिसके बाद मतदाताओं ने मतदान रोककर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

केंद्रीय बलों से झड़प और पत्थरबाजी
घटना की सूचना प्रशासन को दी गई और तकनीकी टीम को बुलाया गया। इसी बीच ग्रामीणों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। ग्रामीणों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और कई वाहनों में तोड़फोड़ की। जवाब में पुलिस और केंद्रीय बलों ने स्थिति संभालने के लिए लाठियां उठाईं। इस दौरान दो-चार जवान और एक वाहन चालक घायल हो गए।

पुलिस ने किया बल प्रयोग, इलाके में तनाव
हालात बेकाबू होते देख पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हथियारों के साथ मोर्चा संभाला। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मतदान खत्म होने से पहले ही खैराशोल और आसपास के क्षेत्रों में तनाव चरम पर पहुंच गया।

चुनाव आयोग की आशंका साबित
चुनाव आयोग ने पहले ही आशंका जताई थी कि शाम चार बजे के बाद कुछ संवेदनशील जिलों में अशांति फैल सकती है। ठीक इसी समय बीरभूम और मुर्शिदाबाद से हिंसा की खबरें आने लगीं, जिससे आयोग की चिंता सही साबित होती दिखी।

सियासी बयानबाजी तेज
इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि पहले चरण की भारी वोटिंग से साफ है कि तृणमूल कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि जनता का रुझान केंद्र सरकार के खिलाफ है। वहीं भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि उनके पोलिंग एजेंटों को कई जगहों पर बाहर किया गया और उनकी टीम पर हमला हुआ। उन्होंने इसे डर और हताशा की राजनीति बताया।


बंगाल चुनाव के पहले चरण में हुई हिंसा ने एक बार फिर राज्य की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और चुनाव आयोग के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।

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