हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 13 मई : 2025,
राजधानी लखनऊ में सोमवार को बिजली निजीकरण को लेकर पॉवर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल के बीच अहम बैठक हुई। लेकिन कई घंटों की गहन चर्चा के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इससे साफ है कि अब बिजलीकर्मियों का आंदोलन आगे बढ़ना लगभग तय है। समिति 14 मई को एक और बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय करेगी और उसी दिन आंदोलन की तारीख का एलान हो सकता है।
समिति का आरोप: निजीकरण का मॉडल विफल
बैठक में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आगरा, ग्रेटर नोएडा और ओडिशा जैसे राज्यों में बिजली निजीकरण की विफलता के उदाहरण दिए। उन्होंने पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों के निजीकरण को ‘थोपने’ का आरोप लगाया और कहा कि पूर्व में सरकार से हुए समझौतों का पालन नहीं किया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि सुधार की जरूरत है लेकिन निजीकरण इसका समाधान नहीं।
महंगी बिजली खरीद रही सरकार
समिति की ओर से बताया गया कि विद्युत उत्पादन निगम से वितरण निगमों को 4.17 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है, जबकि केंद्रीय सेक्टर से 4.78 रुपये प्रति यूनिट। इसके मुकाबले निजी कंपनियों से 5.45 रुपये और शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज के जरिए 7.31 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है। कुछ माध्यमों से तो बिजली 14.204 रुपये प्रति यूनिट तक में खरीदी जा रही है। समिति ने आरोप लगाया कि इससे राज्य को सालाना 9521 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।
पॉवर कॉर्पोरेशन का पक्ष: राजस्व में भारी अंतर
बैठक के बाद पॉवर कॉर्पोरेशन ने भी अपना पक्ष रखते हुए प्रेस बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि ऊर्जा की आपूर्ति और उससे मिलने वाले राजस्व के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है।
- वर्ष 2020-21 में यह अंतर करीब 8000 करोड़ रुपये था।
- वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 46,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
- 2026-27 तक इसके 60,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
कॉर्पोरेशन के अनुसार, बीते पांच वर्षों से बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। दूसरी ओर, पूर्वांचल और दक्षिणांचल के वितरण निगमों के वाणिज्यिक मानक बेहद खराब हैं। पूर्वांचल में प्रति यूनिट 4.33 रुपये और दक्षिणांचल में 3.99 रुपये का घाटा हो रहा है।
अध्यक्ष की अपील: आंदोलन न करें कर्मचारी
डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बैठक में कर्मचारियों से आंदोलन से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और कॉर्पोरेशन लगातार सुधार के प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में किसी भी तरह का आंदोलन प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था को बाधित कर सकता है।
















