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सिर्फ आय से तय नहीं होगी ओबीसी की क्रीमी लेयर: सुप्रीम कोर्ट

यूपीएससी के करीब 60 अभ्यर्थियों को मिली राहत

नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में Supreme Court of India ने स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की आय या वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता के पद, सामाजिक स्थिति और अन्य कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

यह फैसला जस्टिस P. S. Narasimha और जस्टिस R. Mahadevan की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग से जुड़े करीब 60 ओबीसी अभ्यर्थियों को राहत देते हुए केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी।

2016 सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा मामला

मामला 2016 की सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा था। इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन बाद में उन्हें क्रीमी लेयर में बताते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया गया। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने अपने लगभग 65 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि 1993 के मूल दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय केवल आय नहीं बल्कि माता-पिता के पद, सेवा की स्थिति और सामाजिक स्तर जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सामाजिक रूप से आगे बढ़े लोगों को रोकना उद्देश्य

कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ओबीसी वर्ग में जो लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी आगे बढ़ चुके हैं, वे आरक्षण का लाभ न ले सकें। आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो अभी भी सामाजिक रूप से पिछड़े हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आय के आधार पर किसी व्यक्ति को क्रीमी लेयर घोषित करना उचित नहीं है, यदि उसके माता-पिता का पद या सामाजिक स्थिति ऐसी नहीं है जो उन्हें उच्च वर्ग में रखती हो।

भविष्य के मामलों पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ओबीसी वर्ग के कई अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है। साथ ही भविष्य में क्रीमी लेयर तय करने की प्रक्रिया में सरकार और आयोगों को आय के साथ-साथ पद और सामाजिक स्थिति जैसे कारकों का भी ध्यान रखना होगा।

यह निर्णय आरक्षण व्यवस्था की मूल भावना को मजबूत करने वाला माना जा रहा है, जिससे वास्तविक रूप से पिछड़े वर्गों को ही इसका लाभ मिल सके।

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