हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ माने जाने वाले पुजारा ने अपने करियर में धैर्य, दृढ़ता और संघर्ष की मिसाल पेश की। उन्होंने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट से डेब्यू किया था और लगभग डेढ़ दशक तक भारत की बैटिंग लाइनअप को मजबूत स्तंभ की तरह संभाला।
पुजारा ने अपने करियर में 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले और 7000 से ज्यादा रन बनाए। वे खासतौर पर विदेश दौरों पर भारतीय टीम के संकटमोचक साबित हुए। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ उनकी लंबी पारियां क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा याद रहेंगी। उनकी बल्लेबाज़ी की खासियत यह रही कि उन्होंने टीम के लिए अपनी शैली से समझौता किए बिना लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता दिखाई। उन्हें “दीवार” राहुल द्रविड़ का सच्चा उत्तराधिकारी भी कहा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुजारा को उनके योगदान के लिए बधाई दी और ट्वीट कर कहा कि “चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट में धैर्य, अनुशासन और समर्पण की मिसाल कायम की। उनकी पारियां भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को लंबे समय तक प्रेरणा देती रहेंगी।”
बीसीसीआई और पूर्व क्रिकेटरों ने भी पुजारा की भूमिका को याद करते हुए कहा कि उनके बिना भारत की कई ऐतिहासिक जीत संभव नहीं होती। खासतौर पर 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में उनकी जुझारू पारियों ने भारत को सीरीज जीत दिलाने में अहम योगदान दिया था।
चेतेश्वर पुजारा अब घरेलू और काउंटी क्रिकेट में अपना सफर जारी रख सकते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी अनुपस्थिति भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा खालीपन होगी, जिसे भरना आसान नहीं होगा। क्रिकेट जगत और प्रशंसकों ने उन्हें “धैर्य का प्रतीक” बताते हुए शानदार भविष्य की शुभकामनाएं दीं।














